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कर्ज के बोझ तले दबा था सतीश

Thu, 29 Jan 2015 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उध्ामपुर
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कटड़ा के होटल में पत्नी और बेटे सहित कथित रूप से आत्महत्या करने वाला सतीश वर्मा सर से पांव तक कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था। लेनदार लगातार उसकी दुकान और घर के चक्कर लगा रहेे थे।
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उसके लिए जवाब देना मुश्किल हो गया था। परेशान होकर मंगलवार देर रात को सतीश वर्मा ने ऐसा कदम उठाया, ऐसा आस-पड़ोस और रिश्तेदारों का मानना है। इस तरह की घटना का किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। पुलिस को भी प्रथम चरण में आत्महत्या की ही आशंका है।

सतीश वर्मा पेशे से एक सुनार था। उसका घर उधमपुर शहर के वार्ड नंबर 14 में है। सतीश करीब एक वर्ष से मेन बाजार में सुनार का काम कर रहा था। इससे पहले सतीश की दुकान हास्पिटल रोड इलाके में एक गली में थी। करीब दो वर्ष से सतीश का भाग्य पूरी तरह से रूठा हुआ था।
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लगातार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं उसके साथ होती रही। करीब आठ महीने पहले सतीश सोना लेकर जम्मू पहुंचा था। जम्मू के नरवाल में सतीश की कार से चोर लाखों का सोना और नकदी ले उड़े थे। इस चोरी से सतीश को काफी नुकसान हुआ और उस पर लाखों का कर्ज चढ़ गया। इसके बाद सतीश की कार से पंजाब में एक दुघर्टना हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

गाड़ी सतीश का रिश्तेदार चला रहा था। इस दुर्घटना में भी सतीश को लाखों की राशि खर्च करनी पड़ी थी। करीब छह महीने में सतीश की दो बार दुर्घटनाएं हुई थी, जिससे उसकी टांग भी फ्रैक्चर हुई थी।

कर्ज के बोझ तले दबने के कारण सतीश पूरी तरह से टूट चुका था। अचानक मंगलवार को पता नहीं उसने क्या योजना बनाई पत्नी के साथ कटड़ा के लिए निकल पड़ा। अपने बच्चों को स्कूल से सीधे कटड़ा लेकर चला गया।

इन दिनों लेनदारों से लगातार मिल रही थी धमकियां
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सतीश को कुछ दिनों से लगातार लेनदारों से धमकियां भी मिल रही थी। धमकी देने वाले उसे कर्ज नहीं चुकाए जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे थे। बताया जाता है कि इसी कारण सतीश काफी परेशान था। उसने लोगों से बात करना भी कम कर दिया था। हमेशा चुप्पी साधे रहता था। मानसिक रूप से वह पूरी तरह परेशान रह रहा था।

मकान बेचने की भी कर रहा था तैयारी
सतीश का लाखों का शानदार दो मंजिला मकान है। कुछ लोगों का कहना है कि सतीश ने बैंक से कर्ज लेकर मकान को गिरवी रखा था। कुछ अन्य का कहना है कि सतीश मकान को बेचकर कर्ज चुकाने की तैयारी कर रहा था। सतीश ने मकान बेचने के लिए कुछ लोगों से बात भी की थी।

बीएड कर रही थी सतीश की पत्नी
सतीश अपनी पत्नी मोनिका को शिक्षक बनाना चाहता था। इसलिए सतीश ने पत्नी को बीएड कालेज में नामांकन करवाया था। मोनिका सितंबर से लगातार बीएड कालेज में शिक्षा हासिल कर रही थी। उसके कालेज के विद्यार्थियों और स्टाफ को इसकी जानकारी मिली तो सभी हैरान रह गए। मोनिका के काफी सहपाठी भी घर पहुंच गए थे।

सापाठियों के मुताबिक मोनिका सरल स्वभाव की थी। कहीं से वह ऐसा नहीं लग रही थी कि वह इस तरह का कोई कदम उठा कसती है।

एक ही चिता पर हुआ दंपति का संस्कार
शाम करीब पांच बजे पत्नी-पत्नी व बेटे का संस्कार देविका श्मशान घाट पर हुआ। सतीश और उसकी पत्नी मोनिका का संस्कार एक ही चिता पर किया गया। जबकि बेटे के लिए अलग चिता बनाई गई थी। तीनों की अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में शहरवासी पहुंचे थे। यह दृश्य हर किसी के हृदय को विह्वल कर रहा था।
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