उधमपुर। ओमिक्रॉन के मामले बढ़ने के साथ ही देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की आशंका भी बढ़ती जा रही है। अगर तीसरी लहर आती है, तो जिला उधमपुर में आरटीपीसीआर टेस्टिंग करना चुनौती रहेगा। स्वास्थ्य विभाग आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए जम्मू और मिलिट्री अस्पताल पर ही निर्भर रहेगा, क्योंकि उधमपुर में 30 लाख रुपये में स्थापित की गई मशीनरी स्टाफ व फंड की कमी के कारण आज तक शुरू नहीं सकी है।
कोरोना संक्रमितों का पता लगाने के लिए उधमपुर में हर रोज कई लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जाते हैं और इनके सैंपल जम्मू या फिर कमांड अस्पताल भेजे जाते हैं। जम्मू भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट लोगों को तीन से चार दिन के बाद स्वास्थ्य विभाग को दो दिन बाद मिलती है और इससे कोरोना संक्रमित का पता लगाने में बहुत देरी होती है।
इसी को लेकर सरकार की तरफ से करीब 30 लाख रुपये की लागत से अगस्त 2020 में जिला अस्पताल के अंदर आरटीपीसीआर लैब स्थापित की गई थी। इसको चलाने के लिए माइक्रोबायोलाजिस्ट डाक्टर सहित पांच से छह कर्मचारियों की जरूरत थी, लेकिन आज तक इनकी व्यवस्था नहीं हो सकी और यह लैब आज तक काम नहीं कर सकी है।
अगर कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आती है तो उधमपुर में टेस्टिंग को लेकर फिर से हालात खराब होंगे और उधमपुर जम्मू व कमांड अस्पताल की लैब पर निर्भर रहेगा। लेकिन अगर अपनी लैब काम करने लग जाती है तो उधमपुर को जम्मू पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
लैब में एक दिन में एक हजार टेस्ट करने की क्षमता
जिला अस्पताल में लैब को पांच कमरों में स्थापित किया गया है। इसमें आरएनए एक्सट्रेक्शन यूनिट, बाई सेफ्टी यूनिट, पीसीआर यूनिट, आटो क्लेव और -80 से -20 तापमान का रेफ्रिजेरेटर लगाया गया है। इस लैब में एक दिन के अंदर एक हजार आरटीपीसीआर टेस्ट करने की क्षमता है।
फंड की कमी से शुरू नहीं हो पा रही लैब
फंड की कमी के कारण ही लैब शुरू नहीं हो पा रही है। लैब चलाने के लिए हर महीने दस लाख रुपये फंड की जरूरत है। एक हजार टेस्ट के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है। उच्च अधिकारियों को इसके बारे में बताया गया है। फंड उपलब्ध होते ही लैब भी काम करने लगेगी
- डा. विजय रैना, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल, उधमपुर