संवाद न्यूज एजेंसी
डोडा। सेरी में रविवार को आयोजित आनंद मार्ग सेमिनार में आचार्य नभतीतानंद अवधूत ने अत्यंत प्रेरक और विचारोत्तेजक भाषण दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है, इसलिए उसे न केवल सामाजिक नियमों का बल्कि आध्यात्मिक सिद्धांतों का भी पालन करना चाहिए।
आचार्य ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति आध्यात्मिक या धार्मिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है तो उसे पाप माना जाता है। जब वह कानूनी नियमों को तोड़ता है तो उसे अपराध माना जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाप की अवधारणा केवल धार्मिक अंधविश्वास पर आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मौलिक मानवीय मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
आचार्य ने कहा कि मानवता धार्मिक अंधविश्वासों से आगे बढ़ रही है और अपने जीवन को मौलिक मानवीय मूल्यों पर केंद्रित करना चाहती है, इसलिए पाप और अपराध की परिभाषा पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने पाप और अपराध के तीन मुख्य कारण बताए। इनमें शारीरिक और मानसिक पोषण की कमी, संचित पोषण का उपयोग न करना और मानसिक और शारीरिक जड़ता शामिल हैं।
उन्होंने दुनिया भर के तर्कशीलों, मानवतावादी और आध्यात्मिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि अब और देरी न करें। आगे बढ़ें और मानवता के मार्ग से बाधाओं को दूर करें। यह सदविप्र क्रांति का समय है।