रियासी । जिले के भमाग क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। विडंबना यह है कि जिस पांगन देवता वाटर लिफ्ट सप्लाई स्कीम को ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए 2006-2007 में लाया गया था, वह दो दशक बीतने के बाद भी मुकम्मल नहीं हो सकी है। अंजी नाला से पांगन देवता देवस्थान तक पानी पहुंचाने की योजना आज भी फाइलों में है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य अंजी नाला से पानी लिफ्ट कर भमाग के लगभग 15 से 18 गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना था। स्थानीय निवासी बंसी लाल ठाकुर का आरोप है कि जो योजना लाखों की लागत से शुरू हुई थी, उसकी लागत अब करोड़ों में पहुंच गई है। उन्होंने इसमें घोटाले की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय जांच और योजना को जल्द बहाल करने की मांग की है।
जमीनी हकीकत की बात करें तो परियोजना की पाइपलाइनें कई स्थानों पर टूट चुकी हैं और डंगा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। पिछले दो वर्षों से काम पूरी तरह ठप है। इसका सीधा असर भमाग की आबादी और मवेशियों पर पड़ रहा है।
प्राकृतिक जलस्रोतों से ढो रहे पानी
लोगों ने बताया कि अंजी से पानी लिफ्ट कर पांगन देवता देवस्थान तक लाया जाना था, जहां से भमाग के पंद्रह से ज्यादा गांवों में पानी की सप्लाई पहुंचाई जानी थी। दो दशक से भी ज्यादा समय से स्कीम पूरी नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग को चाहिए कि वह स्कीम को दोबारा शुरू कर इसका फायदा ग्रामीणों को दिलाए। रमेश सिंह के अनुसार अंजी नाला से भमाग के कई गांवों तक पानी पहुंचाने की स्कीम आज भी ठंडे बस्ते में है। लोग पानी की सुविधा को तरस रहे हैं। ग्रामीण आज भी घरों से दूर बने प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाने के लिए मजबूर हैं। जल शक्ति विभाग बीस वर्षों से स्कीम पर काम कर रहा है मगर नतीजा शून्य है।
दिए जा रहे फंड
गंभीर मुद्दे पर जल शक्ति विभाग के मुख्य अभियंता नरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि योजना को पूरा करने के लिए फंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जो काम शेष है उसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा ताकि ग्रामीणों को लिफ्ट स्कीम के जरिए राहत मिल सके।