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एक ओंकार अक्षर शिव को जानने के लिए सर्वोत्तम : सूरज कौशल

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रियासी।भगवत कथा में निकली कृष्ण सुदामा की झांकी व कथा करते शास्त्री जी।कथा सुनने को पहुंची मह
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रियासी। श्री सनातन धर्म सभा के हाल में शिव महापुराण कथा रविवार को भी जारी रही। सूरज कौशल ने प्रवचनों में कहा कि एक ओंकार के जरिए ही भगवान शिव को जाना जा सकता है। उसी ओंकार अक्षर बीज रूपी अंड से ब्रह्मा जी का जन्म हुआ। ओम का आकार विष्णु हैं और साकार शिव हैं।
उन्होंने कहा कि स्वर्णयमय अंड इसी से उत्पन्न हुआ। इसके ऊपर के भाग से आकाश और नीचे के हिस्से से पांच तत्व वाली पृथ्वी प्रकट हुई। इसके बाद 48 अक्षरों वाला मंत्र उत्पन्न हुआ। बाद में मृत्युंजय जाप आया। जाप और तप करने से कई पाप नष्ट होते हैं। भगवान शिव की पूजा, उनकी स्तुति अथवा मंत्रों के जाप से हर कोई पाप रहित हो सकता है।
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श्रावण मास भगवान शिव को सबसे प्यारा है। इसमें रोजाना शिवलिंग पर जलाभिषेक करना और बेलपत्र चढ़ाना शुभ और लाभदायक माना जाता है। कथा के बाद आरती कर आए हुए लोगों को प्रसाद बांटा गया।
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