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Udhampur News: एक परिवार बिखर गया, सपने मलबे में दब गए

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भाई और बहन
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राजगढ़ में बादल फटने हुई तबाही, गाडीगढ़ गांव में छाया मातम
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राजगढ़। शुक्रवार देर रात बादल फटने से अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने राजगढ़ तहसील के गाडीगढ़ गांव में मातम का साया छा गया है। इस घटना में घर और जिंदगियां बह गईं। पीड़ितों में दो भाई-बहन अश्विनी शर्मा (27) और विरता देवी (29) भी शामिल हैं जिनके भविष्य बनाने के सपने पल भर में ही टूट गए।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में तहसील सप्लाई अधिकारी (टीएसओ) मोहन लाल के दोनों बच्चे उस समय सो रहे थे जब पहाड़ ने अपना कहर बरपाया। उनका घर जो कभी उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरा था अब खंडहर बन चुका है। पुलिस, एसडीआरएफ, सीआरपीएफ और सेना की संयुक्त टीमों ने मलबे से उनके शवों को निकालने के लिए अथक प्रयास किया।
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विरता ने अर्थशास्त्र में एमए की थी। उनके भाई अश्विनी ने जम्मू विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में स्नातकोत्तर की थी। दोनों नौकरी के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे थे। उनकी शिक्षा और महत्वाकांक्षा ने उन्हें परिवार के लिए गर्व का स्रोत बना दिया था। वे अपने पैरों पर खड़े होकर हमारा साथ देना चाहते थे। एक ही रात में सब कुछ खत्म हो गया। एक रिश्तेदार ने आंसू भरी आंखों से कहा कि त्रासदी के समय अश्विनी और विरता के पिता बसंतगढ़ में ड्यूटी पर थे। उनकी मां गायत्री देवी जो इस हादसे में बच गईं अभी भी सदमे में हैं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे।
इस आपदा ने उनके रिश्तेदार ओम राज की भी जान ले ली जो एक मजदूर थे और परिवार के साथ रह रहे थे। उनका शव भाई-बहनों के साथ बरामद किया गया।
त्रासदी में और इजाफा हुआ। विद्या देवी (55) जो अपने घर में अकेली रह रही थीं भी बाढ़ में बह गईं। उनके पति तरलोकी नाथ घटना के समय घर से बाहर थे। खोज दल बारिश और खतरनाक इलाकों में उनके शव को ढूंढने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
ग्रामीण अश्वनी के अंतिम क्षणों को याद करते हैं। बादल फटने के तुरंत बाद वह और उनके चाचा द्वारका नाथ यह देखने के लिए बाहर निकले कि क्या हुआ था। कुछ ही क्षणों बाद, एक नया भूस्खलन हुआ, जिससे वे मलबे में दब गए। अश्वनी का शव बरामद कर लिया गया है जबकि द्वारका नाथ अभी भी लापता है।
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भारी बारिश के कारण दूसरे दिन भी बचाव अभियान में बाधा आ रही है, लेकिन आशा और निराशा के बीच प्रयास जारी हैं। गाड़ीगढ़ के लोगों के लिए यह त्रासदी किसी प्राकृतिक आपदा से कहीं बढ़कर हैं। यह एक परिवार के अपूरणीय क्षति अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता और उन नन्ही जिंदगियों की कहानी है जिनके सपने उड़ान भरने से पहले ही मलबे में दब गए।

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