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पांच ब्लाक की आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन

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सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन देने की मांग पर जिले की पांच ब्लाक की आशा वर्कर्स ने सोमवार को मिनी स्टेडियम के अंदर प्रदर्शन किया। आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार की तरफ से सुबह से शाम तक काम करवाया जा रहा है। लेकिन मानदेय केवल दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तो बस का किराया भी नहीं बचा है। इससे सड़क पर उतरने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है।
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प्रदर्शन के दौरान टिकरी से रीता रानी, चिनैनी से सृष्टा देवी व अन्य आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार की गलत कार्यप्रणाली के कारण ही उनको अब काम छोड़ कर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। 2006 में सरकार की तरफ से उनको नियुक्त किया गया था। पहले तो उनको केवल स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करवाया गया, लेकिन फिर उनको धीरे धीरे कई विभागों के साथ जोड़ करवाया जाने लगा।
मौजूदा समय में उनको हर विभाग में काम करवाया जा रहा है। जब भी कोई सर्वे करवाया जाता है तो उनको उसमें शामिल कर दिया जाता है। चुनाव के दौरान भी उनको ड्यूटी पर तैनात काम करवाया जाता है। जब कोई नई सरकारी योजना को लांच किया जाता है तो लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए आशा वर्कर्स को लगा दिया जाता है। ग्राम सेवक, पटवारी, तहसीलदार व अन्य कई अधिकारी उनसे कई तरह के काम करवाते हैं। लेकिन वेतन के नाम पर उनको केवल दो हजार रुपये मानदेय ही मिल रहा है।
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वर्तमान में सभी आशा वर्कर्स को कोविड सेंटर में नियुक्त किया गया है और सुबह से शाम तक आशा वर्कर्स से काम करवाया जा रहा है। उनके पास अब कोविड सेंटर तक पहुंचने के लिए यात्री वाहन का किराया भी नहीं बचा है। पिछले दिनों डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। 15 दिन के अंदर मांगों को पूरा कर राहत नहीं प्रदान की, तो आने वाले दिनों में मार्ग बंद कर प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगी।
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