राजकीय डिग्री कालेज में शिक्षिकाओं ने छात्राओं को माडर्न ड्रेस नहीं पहनने की सलाह क्या दे दी कि बवाल मच गया। छात्र-छात्राओं ने वीरवार को जमकर प्रदर्शन किया। मामला बिगड़ता देख प्रिंसिपल ने तत्काल प्रभाव से दो आरोपी शिक्षिकाओं को सस्पेंड कर जांच के आदेश जारी कर दिए।
दरअसल, वीरवार की सुबह कालेज लगने के बाद ही अचानक कक्षाओं से छात्र-छात्राएं बाहर आ गए। उन्होंने कालेज का गेट बंद कर दिया और शिक्षकों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि प्रिंसिपल एसएस भलवाल ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लड़कियों की ड्रेस पर टिप्पणी करने के कारण मचे बवाल को शांत नहीं किया जा सका।
प्रदर्शनकारी दोनों शिक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे। दोनों ही कांट्रैक्चुअल हैं। उनकी इसी साल नियुक्ति हुई है। छात्राओं के अनुसार इन शिक्षकों ने बुधवार को उन्हें कहा कि वह सलवार कमीज पहनकर आएं। माडर्न कपड़े पहनने के कारण लड़के आकर्षित होते हैं, इससे लड़कियों से बलात्कार होता है।
छात्राओं के अनुसार बलात्कार का अगर आंकड़ा देखा जाए तो सलवार कमीज में भी ऐसी घटनाएं खूब होती हैं। मासूम लड़कियों से भी बलात्कार की घटनाएं हुई हैं। जिंस व माडर्न कपड़ों के कारण नहीं। लड़कियां किस तरह के कपड़े पहनें, इसका फैसला करना उनका मौलिक अधिकार है।
इन शिक्षकों को चाहिए कि वह लड़कों की मानसिकता बदलने के लिए काम करें। लड़कियों को नहीं समझाएं। प्रिंसिपल एसएस भलवाल के अनुसार इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।