पब्लिक वेलफेयर फंड का प्रयोग सही तरीके से नहीं होने से नाराज चालकाें ने मिनी बस आपरेटर यूनियन के बैनर तले परिवहन विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वर्ष 2005 से लेकर अब तक का हिसाब देने की मांग कर रहे थे।
शुक्रवार सुबह करीब ग्यारह बजे रैंबल गढ़ी मेटाडोर स्टैंड पर चालकाें ने परिवहन विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे यूनियन के उप चेयरमैन दर्शन सिंह ने कहा कि वर्ष 2005 में पब्लिक वेलफेयर फंड बनाया गया था। इसके तहत वाहनों को पास करवाने के बाद उनसे 600 रुपये काटे जाते थे, ताकि दुर्घटना होने पर उस फंड का प्रयोग कर चालकों के परिवार को सहायता राशि दी जा सके। कुछ समय पूर्व केवल नये वाहनों से ही पैसे लिए जा रहे थे, लेकिन एक बार फिर से परिवहन विभाग की ओर से पुराने वाहनों के पास होने पर उनसे पैसे वसूले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुरानाें वाहनों को वर्ष में दो बार पास किया जाता है। इसके कारण उन्हें वर्ष में 1200 रुपये भरने पड़ रहे हैं। इस बारे में जब परिवहन विभाग के आला अधिकारियों से बात की जाती है तो वह सही जवाब और सही जानकारी मुहैया नहीं कराते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व विभाग इस बात की जानकारी दे कि जिला उधमपुर में हादसों में कई लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं। अभी तक पब्लिक वेलफेयर फंड से किसी भी चालक या अन्य लोगों को मदद मुहैया नहीं करवाई गई है। उन्होंने कहा कि आखिर फंड में जमा होने वाले पैसे कहां खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि पब्लिक वेलफेयर फंड के तहत वर्ष 2015 से लेकर अब तक जमा हुए पैसों को हिसाब दिया जाए। चालकों ने राज्य सरकार पर जिला उधमपुर के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने श्रीनगरऔर जम्मू में छात्राओं को स्कूटियां दी थीं, लेकिन उधमपुर जिले की छात्राओं के साथ भेदभाव किया किया जा रहा है। उन्हें इस स्कूटियां क्यों नहीं दी गईं। उन्होंने राज्य सरकार से उधमपुर की छात्राओं को भी स्कूटियां देने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में चालक शामिल थे।