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सालों से गंदगी व मलबे से पटे देविका के कुंड

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उधमपुर। गंगा नदी की बड़ी बहन देविका नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए काम तो किया जा रहा है, लेकिन देविका परियोजना के तहत देविका के कुंड को साफ करने का प्रावधान नहीं रखा गया है। इसी कारण देविका के कुंड की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जब तक कुंड साफ होने के बाद पुराने स्वरूप में नहीं लौटते हैं तब तक देविका परियोजना का कोई लाभ नहीं है।
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देविका परियोजना पर दो भागों में काम किया जा रहा है। पहले भाग में शहर के अंदर 120 किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइप लाइन बिछाई जा रही है और दूसरे भाग में देविका घाट का सौंदर्यीकरण किया जाना है। करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर देविका घाट का सौंदर्यीकरण तो कर दिया है, लेकिन देविका के कुंड साफ नहीं किए गए हैं। देविका परियोजना के लिए तैयार डीपीआर में कुंड की सफाई का प्रावधान ही नहीं रखा गया और इसी कारण किसी ने भी कुंड की सफाई की तरफ ध्यान नहीं दिया है।
देविका कुंड का बहुत ज्यादा महत्व है। करीब 15 वर्ष पहले कुंड साफ थे और इनमें गहराई थी। शहरवासी देविका में पहुंचने पर इन कुंड के अंदर स्नान करते थे। बच्चे भी इसके अंदर नहाते थे। लेकिन मौजूदा समय में चोरों कुंड गंदगी व मलबे से भरे हुए है। इनकी गहराई एक फीट से भी कम रह गई है। शाम किशोर, विजय कुमार, आशीष व अन्य शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर देविका परियोजना का काम किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत देविका के कुंड को साफ करने का भी प्रावधान रखा जाना चाहिए था।
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केंद्रीय मंत्री को भी लिखा गया है पत्र
नगर परिषद की सीवरेज कमेटी के चेयरमैन विक्रम सलाथिया ने केंद्रीय राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह को जुलाई में एक पत्र लिख कर अपील की थी कि देविका परियोजना के तहत देविका कुंड को साफ करने के लिए विशेष तौर पर काम किया जाए। कुंड के पुराने स्वरूप में लौटने के बाद शहरवासियों को देविका परियोजना का सही लाभ मिलेगा। एमओएस कार्यालय में नियुक्त आफिसर आफ स्पेशल ड्यूटी प्रशांत कुमार झा ने इस पत्र का जवाब भेजा और जम्मू-कश्मीर के कमिश्नर सेक्रेटरी केे कुंड को साफ करवाने के दिशा निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कुंड को साफ करने का काम शुरू नहीं हो सका है।
देविका परियोजना में कुंड को साफ करने का प्रावधान रखा ही नहीं गया है। इसी कारण इनकी सफाई कोई नहीं कर रहा है। लेकिन नगर परिषद इसको लेकर अपनी तरफ से प्रयास कर रहा है। बड़ी परेशानी है कि कुंड के अंदर जेसीबी को उतारने के लिए रास्ता नहीं है। अगर देविका घाट के रास्ते जेसीबी को ले जाते हैं तो घाट को नुकसान पहुंचता है। इनको दिहाड़ीदारों को लगा कर ही साफ किया जा सकता है।
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- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, नगर परिषद चेयरमैन
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