बारिश के दौरान यात्रियों को मेटाडोर व अन्य गाड़ियों के लिए दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर के तकरीबन किसी भी स्टैंड में यात्री शेड नहीं है। इससे बारिश और धूप में लोगों को परेशान होना पड़ता है।
शहर के प्रमुख चौक सैला तालाब इलाके में स्थित मेटाडोर स्टैंड पर पांच वर्ष से यात्री शेड का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। यात्री शेड की सुविधा न होने के कारण हर रोज यात्रियों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। शहरवासियों द्वारा कई बार मांग करने के बावजूद नगर परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है।
सैला तालाब मेटाडोर स्टैंड शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में एक है, जहा हर रोज सैकड़ों यात्री मलाड़, बट्टवालियां, लौंडना, गढ़ी, रैंबल व अन्य कई रूट पर चलने वाली मेटाडोर पकड़ने के लिए पहुंचते हैं।
करीब छह वर्ष पहले नगर परिषद ने यात्रियों की सुविधा के लिए मेटाडोर स्टैंड पर यात्री शेड का निर्माण कार्य शुरू किया था। काम अभी आधा ही हुआ था कि अचानक नगर परिषद ने निर्माण कार्य को बंद कर दिया।
पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद नगर परिषद ने इसका निर्माण शुरू नहीं किया है। शेड की सुविधा न होने के कारण यात्रियों को हर रोज कड़कती धूप व तेज बारिश में परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
अनवर, गीता देवी, रमेश कुमार, राकेश कुमार, सुभाष पचियाला व अन्य शहरवासियों ने बताया कि कई बार यात्री शेड का निर्माण करने की मांग को नगर परिषद के अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन आज तक नगर परिषद की तरफ से काम को शुरू करने के लिए कोई जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं।
नगर परिषद की लापरवाही के कारण ही हर रोज मेटाडोर स्टैंड पर यात्री परेशानियों से जूझ रहे हैं। नगर परिषद ने लाखों की राशि खर्च करके आधा ढांचा तो तैयार कर लिया है।
तैयार की अधूरी इमारत को लोगों ने बिना इजाजत के व्यवसाय के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। जानकारी होने के बाद भी नगर परिषद न तो बंद पड़ा निर्माण कार्य शुरू कर रहा है और न ही व्यवसाय करने वाले लोगों पर कार्रवाई कर रहा है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द इसका निर्माण कार्य आरंभ करके समस्या को हल किया जाए।