पिछले पांच महीने से मांग के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे पूर्व पोर्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उन पर ध्यान नहीं दिया गया तो संसद भवन के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। इन्हें वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सेना भर्ती किया था, लेकिन युद्ध के बाद इन्हें निकाल दिया गया था।
मांगों के समर्थन में सेना के ये पूर्व पोर्टर शनिवार को शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित हुए और प्रदर्शन किया। पोर्टर यूनियन के बैनर तले नारेबाजी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर 14 मार्च तक मांग पर फैसला नहीं लिया गया तो उनका अगला प्रदर्शन संसद भवन के बाहर होगा।
उन्होंने कहा कि वह लोग सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सेना ने जिन युवकों को पोर्टर कंपनी में भर्ती किया गया था, उनको युद्ध की समाप्ति के बाद घर भेज दिया।
उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जब भी कहीं भर्ती होगी तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन पंद्रह साल बाद भी उन पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि मांग के समर्थन में वह प्रशासन और सरकार का दरवाजा कई बार खटखटा चुके हैं, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी।
हार-थककर उन्हें प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन में चंद्रमोहन, अशोक कुमार, शम्मी कुमार, काकू राम, संजय कुमार, रमेश कुमार, बिशन दास आदि शामिल रहे।