उधमपुर। अमृत सरोवर योजना आने के बावजूद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ते पीर बाबा चौक के पास बने प्राचीन तालाब की दयनीय स्थिति बनी हुई है। कभी इस तालाब का पानी लोग पीते थे लेकिन आज मवेशी भी मुुंह फेर लेते हैं।
इस ओर न तो प्रशासन और न ही नगर परिषद का ध्यान जा रहा है। हालांकि जिस जगह पर यह तालाब है, वहां पर धार्मिक स्थान होने के चलते लोगों की आवाजाही भी काफी है। कई बार स्थानीय लोग प्रशासन व नगर परिषद के आला अधिकारियों से तालाब की मरम्मत की गुहार लगा चुके हैं लेकिन उसके बावजूद भी कुछ नहीं हो सका। इसके चलते यह प्राचीन धरोहर लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय में इस तालाब से क्षेत्र में होने वाले विवाह व अन्य कार्यक्रमों के लिए पानी को इस्तेमाल किया जाता था लेकिन मौजूदा समय में तालाब की दशा के चलते जानवर भी पानी पीने से अपना मुंह फेर लेते हैं।
अमृत सरोवर योजना आने के बावजूद इस तालाब का नहीं हो सका जीर्णोंद्वार
सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में कई तालाबों की मरम्मत करवाई गई लेकिन शहर के बीचोंबीच होने के बावजूद इस ओर प्रशासन का ध्यान नहीं गया। गौरतलब है कि यह क्षेत्र आठ साल पहले नगर परिषद के अधीन आने से वार्ड में तबदील हो गया था।
स्थानीय निवासी सुषमा महाजन का कहना था कि इस प्राचीन तालाब की दशा दिन व दिन दयनीय होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना चलाई गई थी तो इस तालाब को भी उस योजना में रखकर इसकी मरम्मत करवानी चाहिए ली लेकिन ऐसा नहीं हो सका, जिसका उन्हें काफी मलाल है।
ज्योति देवी का कहना था कि यह तालाब जहां हमारे बुजुर्गों की निशानी होने के साथ ही प्राचीन धरोहर भी है। लेकिन योजना आने के बावजूद इस तालाब का कुछ नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सिर्फ तालाब में कचरा व गंदे पानी से उठने वाली बदबू से लोग काफी परेशान हैं क्याेंकि अभी तक न तो तालाब की मरम्मत का कार्य हो सका और न ही साफ सफाई।
नीशु देवी का कहना था कि दस साल पहले इस तालाब की ब्लॉक की ओर से चाहरदीवारी का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया था लेकिन उसे भी अधूरा छोड़ दिया गया था। इसके बाद से आज तक इस तालाब की सुध लेने के लिए कोई नहीं आया। उन्होंने कहा कि शहर के बीचोंबीच तालाब होने के बावजूद अमृत सरोवर योजना के तहत भी इस तालाब का विकास नहीं हो सका।
नीलम शर्मा का कहना था कि हम नगर परिषद व प्रशासन से यही मांग करते हैं कि इस तालाब को भी अमृत सरोवर योजना में लाया जाए और जल्द से जल्द इस तालाब की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया जाए ताकि यह प्राचीन धरोहर बच सके। उन्होंने बताया कि इससे पहले सीईओ का कहना था कि चुनावों के बाद इस तालाब की साफ सफाई करवाई जाएगी और इसकी चाहरदीवारी के बारे में भी कुछ किया जाएगा लेकिन उसके बावजूद कुछ भी नहीं हो सहा।
इस संदर्भ में नगर परिषद के सीईओ राजेंद्र ढींगरा का कहना था कि अमृत सरोवर योजना के तहत जल्द ही इस तालाब की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया जाएगा ताकि प्राचीन धरोहर बची रहे और लोगों को आ रही समस्या से भी निजात मिल सके।
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