- अल्कोहल-फ्री और प्राकृतिक खुशबू वाले इत्र को किया जा रहा है अधिक पसंद
उधमपुर। रमजान के चलते इत्र की खुशबू से बाजार महक गया है। दुकानों पर खासतौर पर इत्र की मांग में उछाल देखने को मिल रहा है। नमाज और इबादत से जुड़ी वस्तुओं की मांग बढ़ गई है। पारंपरिक रूप से नमाज अदा करने से पहले इत्र लगाना सुन्नत माना जाता है इसलिए लोग खुशबूदार इत्र खरीदने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं।
अल्कोहल-फ्री और प्राकृतिक खुशबू वाले इत्र को अधिक पसंद किया जा रहा है। लोगों का मानना है कि इत्र केवल खुशबू के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता और ताजगी का प्रतीक भी है। नमाज से पहले इत्र लगाना साफ-सफाई और आदर की भावना को दर्शाता है। बाजार में कई प्रकार के इत्र उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने बताया कि इत्र की कीमत 100 से लेकर 2000 रुपये तक है। इत्र लंबे समय तक टिकने वाली खुशबू के कारण परफ्यूम से ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
बाजार में जोरावर इत्र (20 एमएल) 200 रुपये का है जिसकी मांग युवाओं के बीच ज्यादा है। व्हाइट उद 75 से शुरू होकर 150 रुपये तक मिल रहा है। ब्लू वाटर, कूल ड्राप्स, आर जैस्मिन 100 रुपये में उपलब्ध है जबकि कस्तूरी इत्र 50 रुपये से शुरू हो जाता है। गर्मी में हल्की और सौम्य खुशबू पसंद की जाती है जबकि सर्दियों में गाढ़ी और तेज खुशबू वाले इत्र अधिक बिकते हैं।
रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्मशुद्धि का मार्ग है। रोजे के दौरान इंसान का दिल और शरीर दोनों साफ होना चाहिए। न तो दिल में कोई बुरी सोच रखनी चाहिए और न ही आंखों से कुछ गलत देखना चाहिए। रमजान संयम, सब्र और नेक आचरण की सीख देता है। हजरत मोहम्मद साहब को खुशबू बेहद पसंद थी इसलिए आज भी नमाज से पहले इत्र लगाना परंपरा का अहम हिस्सा है।
- गुलाम मोहम्मद शाह, दुकानदार।