नबील अहमद वानी ने सीमा सुरक्षा बल की असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में पूरे देश में अव्वल स्थान हासिल कर इतिहास रच डाला है। नबील का कहना है कि हाथों में पत्थर लेने से युवाओं का भविष्य नहीं बदल सकता। इसके लिए कश्मीर के युवाओं को हाथों में कलम थामनी होगी।
उधमपुर की आदर्श कालोनी के रहने वालेे स्वर्गीय रफीक वानी के पुत्र नबील अहमद वानी ने सीमा सुरक्षा बल की असिस्टेंट कमांडेंट (वर्क्स) परीक्षा में पूरे देश में नंबर एक रैंक हासिल किया है।
नबील के पिता पेशे से एक शिक्षक थे। उन्होंने हमेशा से अपने बेटे को समाज के प्रति कुछ अच्छा करने की सीख दी। नबील कहते हैं कि इस सफलता को साझा करने के लिए आज उनके पिता नहीं है।
पर यह उन्हीं की प्रेरणा है कि वह इस परीक्षा में अव्वल आया। नबील मौजूदा समय में राज्य सरकार के वाटर शेड कार्यालय में बतौर सिविल इंजीनियर काम कर रहे हैं। नबील ने कहा कि उनका पहले से ही सपना था कि वह सुरक्षा बल में शामिल होकर देश की सेवा करें।
इसलिए उन्होंने वॉटर शेड में नौकरी हासिल करने के बावजूद भी बीएसएफ की असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा की तैयारियां नहीं छोड़ी। वर्ष 2013 में भी उन्होंने परीक्षा दी थी, लेकिन 8 अंक कम होने की वजह से मेरिट हासिल नहीं कर पाए।
इसके बाद उन्होंने इस साल दोबारा परीक्षा दी और अव्वल स्थान हासिल कर राज्य ही नहीं पूरे देश में उधमपुर का नाम रोशन किया है। नबील का कहना है कि कुछ युवा पहले प्रयास में असफल हो जाने पर हिम्मत हार जाते हैं।
उन्हें हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि बिना लगातार प्रयास करने के असफलता को सफलता में नहीं बदला जा सकता है। गैर सरकारी संस्था जियो और जीने दो द्वारा जबील को बीएसएफ की असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में अव्व्ल आने के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संस्था के प्रधान तारिक शाह ने कहा कि नबील जैसे युवाओं के कारण अन्य युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। नबील द्वारा इस परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया गया है। इसके लिए संस्था द्वारा नबील को सम्मानित किया जाता है।