पौनी। किसानों का रुझान खेती से कम हो रहा है। खासकर मक्की की फसल को लेकर निराशा देखी जा रही है। अधिकांश किसानों ने मक्की की बुवाई न करने का फैसला लिया है।माड़ी नाला पंचायत के देविंद्र शर्मा और मदन लाल ने बताया कि गेहूं की फसल में भी लागत के मुकाबले उचित मुनाफा नहीं मिल पाया। बीज और बुवाई में जितना खर्च आता है, उतनी आमदनी नहीं हो रही जिससे आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या बंदरों का बढ़ता आतंक है। बंदर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे ही बीज अंकुरित होते हैं, बंदर उन्हें उखाड़कर खा जाते हैं जिससे फसल तैयार होने से पहले नष्ट हो जाती है। इस स्थिति में किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
सुगल निवासी रमेश चंद्र और कोठियां निवासी मुबारक सिंह ने भी बताया कि बंदरों के कारण खेती करना बेहद मुश्किल हो गया है। अगर सरकारी डिपो से राशन न मिले तो उनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है। यदि समय रहते सरकार ने बंदरों की रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में लोग खेती छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।