पालकी से ले जायी जा रही बीमार महिला।
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चिनैनी तहसील का ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ी है, जहां लोगों की आवाजाही आज भी पैदल ही होती है। ऐसे में यदि गांव में कोई बीमार हो जाए तो पालकी ही एक मात्र सहारा बचता है। इसी से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। दूरदराज क्षेत्रों में बसते लोगों को करीब तीन से चार घंटों का समय अस्पताल तक पहुंचने में लग जाता है।
शुक्रवार को भी गांव टंडार से चिनैनी अस्पताल में एक महिला मरीज को इलाज के लिए लाया गया, जिसे अस्पताल पहुंचाने में करीब चार घंटे लगे। मरीज के रिश्तेदारों ने बताया कि महिला को किसी कारण चोट आई थी। वह पैदल चलकर नहीं आ-जा सकती थी, लेकिन उसे पालकी के सहारे लाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उनके गांव तक सड़क तो बनाई गई है, लेकिन सड़क का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते लोगों को आज भी पैदल ही आना-जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गांव में सड़क सुविधा का लाभ नहीं होने से उन्हें मजबूरी में पालकी से मरीज को ले जाना पड़ता है, जिसमें उन्हें घंटों लग जाते हैं।
उनका कहना था कि यदि गांव में सड़क सुविधा होती तो लोगों को गाड़ियों का लाभ मिलता, लेकिन दूरदराज क्षेत्र होने के कारण ऐसी सुविधा नहीं होने से लोगों की दिक्कतें बढ़ती हैं। उन्होंने सरकार से मांग उठाई है कि चिनैनी क्षेत्र में गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाई जाए ताकि लोग इन सड़कों का लाभ ले सकें।