फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: बेसहारा व जरूरतमंद बच्चों के लिए अब 4 हजार रुपये प्रति माह की सहायता

Tue, 25 Feb 2025 12:46 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
बिन मां-बाप के बच्चों को किया जा रहा शिक्षित, अब तक दो हजार रुपये ही मिलते थे
विज्ञापन

उधमपुर। केंद्र सरकार की ओर से मिशन वात्सल्य के तहत शुरू की गई स्पांसरशिप योजन के तहत अब समाज कल्याण विभाग की ओर से अनाथ या फिर एकल माता-पिता के बच्चों के बेहतर पोषण व शिक्षा के लिए 4000 रुपये की मासिक यानि 48000 रुपये सालाना सहायता प्रदान की जा रही है। हालांकि बीपीएल परिवार से तालुक रखने वाले बच्चे ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं। वर्ष 2019 में शुरू हुई योजना के तहत पहले जरूरतमंद बच्चों को 2000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। जिसे बढ़ाकर अब 4000 रुपये मासिक कर दिया गया है। योजना के तहत जिस बच्चे के पिता का देहांत हो गया है और उसकी मां ही उसका पालन पोषण कर रही है, या फिर जिसकी मां नहीं और पिता आर्थिक रूप से तंगी का सामना कर रहा है, उसे योजना के लिए पात्र माना जाता है। खासकर जो बच्चे अनाथ हैं और उनके रिश्तेदार उनको अनाथ आश्रम नहीं भेजना चाहते लेकिन आर्थिक रूप से पालन पोषण कर पाने में असमर्थ हैं, उन बच्चों को विभाग की ओर से प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जाता है। इसके अलावा जो परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है, उन परिवार के बच्चों के लिए भी योजना के तहत बेहतर पोषण और शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
अब तक 259 बच्चे ले रहे योजना का लाभ
वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते योजना को अमल में नहीं लाया जा सका। जिसके बाद 2021 और 22 में योजना का लाभ लेने के लिए 58 परिवारों ने आवेदन कर योजना का लाभ ले पाए। वर्ष 2023-24 में लाभार्थियों की संख्या 201 पहुंच गई और उन्हें भी 2000 रुपये मासिक का लाभ प्राप्त हो रहा है। जबकि 2024 में इस राशि को बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया। वर्ष 2024-25 में 191 बच्चों को योजना के लाभ के लिए मंजूरी दे दी गई। जिले में मौजूदा समय में कुल 259 बच्चे योजना का लाभ ले चुके हैं। संवाद
विज्ञापन

6 वर्ष की आयु के बाद ले सकते हैं लाभ
योजना के तहत विभाग की ओर से 6 वर्ष की आयु के बाद बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। जिसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करना है। हालांकि शुरूआत के तीन साल ही जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ देने का प्रावधान है। इसके लिए हर तीन माह बाद परिवार का सर्वे किया जाता है और अगर परिवार आर्थिक रूप से खुद को सक्षम कर लेता है तो तीन साल बाद योजना का लाभ बंद कर दिया जाता है। लेकिन फिर भी अगर कोई परिवार आर्थिक तंगी से उबर नहीं पाया है तो उसके लिए सरकार की ओर से बच्चे 18 साल तक का प्रावधान भी है, लेकिन उसके लिए परिवार का तीन साल फिर से सर्वेक्षण किया जाना जरूती है।
विज्ञापन

पीएचएच और बीपीएल परिवार से जुड़े इन बच्चों को ही मिलेगा लाभ:
- अनाथ बच्चे
- सिंगल मदर चाइल्ड
- सिंगल फादर चाइल्ड
- जीवन के खतरे से जुड़ी बीमारी से पीड़ित माता-पिता के बच्चे।
- दिव्यांग, मूकबधिर
प्रत्येक जिले के पास 201 लाभार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य हैं। तीन साल पूरे होने पर योजना को बंद कर दिया जाता है। जैसे-जैसे नए लाभार्थी का आवेदन प्राप्त होता है उसे योजना के तहत लाभ मुहैया कराने के लिए जांच के बाद मंजूरी के लिए भेज दिया जाता है। इस वर्ष 191 मामलों को मंजूर किया जा चुका है।
कणिका गुप्ता, जिला अधिकारी समाज कल्याण विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें