संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। ब्लॉक मजालता में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए चार प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) खोले हैं। चारों पीएचसी में एक्स-रे मशीन भी लगाई गई है लेकिन तकनीशियन न होने से यह मशीनें धूल फांक रही हैं।
हालात यह हैं कि चाहे गर्भवती महिलाएं हों या फिर अन्य मरीज एक्स-रे करवाने के लिए या तो उन्हें प्राइवेट क्लीनिक में जाना पड़ता है या फिर 40 किलोमीटर दूर जीएमसी उधमपुर आना पड़ रहा है। हालांकि लोग कई बार विभाग से इन स्वास्थ्य केंद्रों में खाली पड़े तकनीशियन के पद भरने की गुहार लगा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक पिछले सात सालों से इन चारों पीएचसी में एक्स-रे तकनीशियन न होने की वजह से ब्लॉक की तकरीबन 40 से 50 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है।
इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में धार रोड पड़ने के चलते ज्यादातर बाहरी राज्यों से आने वाले लोग भी इसी रास्ते से होकर पटनीटॉप व श्रीनगर आते जाते हैं लेकिन हैरानी की बात है कि न तो इन चारों पीएचसी में न तो एक्स-रे की सुविधा है और न ही अल्ट्रासाउंड की। लोगों को मजबूरन अधिक पैसे खर्च कर निजी क्लीनिकों में जाकर अपने टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
निजी क्लीनिकों पर जाने को मजबूर मरीज
ब्लॉक मजालता में पड़ते इन चार सेंटरों में पीएचसी मानसर, पनारा, खून और थयाल में न तो एक्स-रे और न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। सरकारी अस्पताल में 120 रुपये खर्च कर मरीज एक्स-रे करवा सकते हैं लेकिन तकनीशियन न होने के कारण उन्हें निजी क्लीनिकों पर 250 से 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। विभाग सबकुछ जानते हुए भी मौन है।
गर्भवती महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही
सामान्य मरीजों की तुलना में गर्भवती महिलाएं अधिक परेशान हैं। क्योंकि नौ महीने तक डाॅक्टर गर्भवती महिलाओं के कई बार एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड करवाते हैं लेकिन इन सेंटरों में सुविधा न होने के चलते गर्भवती महिलाओं को मजबूरन बाहर से एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं। हालांकि एक्स-रे तो 250 से 300 के बीच हो जाता है मगर अल्ट्रासाउंड के लिए उन्हें 500 से लेकर 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि पीएचसी और सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड 100 रुपये में हो जाता है।
कोट...
पीएचसी में तकनीशियन की कमी को लेकर लिखित में उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इन चारों पीएचसी में तकनीशियन के खाली पड़े पदों को भर दिया जाएगा। ताकि लोगों को आ रही परेशानी से निजात मिल सके।
-डॉ. मोहम्मद लतीफ, बीएमओ, मजालता
रिपोर्ट, परवेज खान