रामगनर सड़क हादसे के दौरान गंभीर रूप से जख्मी होने वाले घायलों को एयर लिफ्ट कर जम्मू लाने के लिए पर्याप्त चापर सुविधा नहीं मिल पाई।
घायलों की हालत गंभीर होने के कारण कुछ लोगों ने उन्हें चापर की बजाए कारों से जम्मू पहुंचाया। लोगों का कहना था कि एकमात्र चापर सुविधा होने और बड़ी संख्या में घायल होने के कारण उन्होंने घंटों इंतजार करने की बजाए सड़क मार्ग से घायलों को लाना उचित समझा।
महत्वपूर्ण यह है कि कार से पहुंचे दो घायलों के बाद भी चापर से कुछ घायल जीएमसी पहुंचे। कार से पहुंचे घायलों की हालत काफी गंभीर थी, लेकिन उन्हें लाने वाले रिश्तेदारों ने कहा कि उनके पास कोई और चारा नहीं था। उन्होंने घायलों को उधमपुर ले जाने की बजाए सीधा जम्मू लाना बेहतर समझा।
जम्मू पहुंचने के बाद भी घायलों की समस्याएं कम नहीं हुईं। एयरपोर्ट से एंबुलेंस द्वारा जीएमसी लाए गए घायलोें के लिए इमरजेंसी के पास पहले से स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं किए गए। जबकि दुर्घटना और घायलों को लाने की सूचना पहले ही अस्पताल प्रबंधन को दे दी गई थी।
बाद में लोगोें के शोर मचाने पर अस्पताल के अन्य हिस्से से चंद स्ट्रेचर लाए गए। लोगों में इस बात की भी नाराजगी थी कि बड़ी दुर्घटना या आपदा के बाद मंत्रियों के फोन बजते ही इमरजेंसी के गेट पर स्ट्रेचर के अलावा डाक्टरों की टीम मौजूद रहती थी।
चूंकि अभी राज्यपाल शासन लागू है और ऊपर से कोई फोन न आने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने इतनी बड़ी दुर्घटना को हलके में लिया। लोगों का कहना था कि घायल कोई बड़ा अफसर या पहुंच वाला न होने के कारण आपात व्यवस्था की जरूरत नहीं समझी गई।
घायलोें के पहुंचने से पहले इमरजेंसी के सामने डाक्टर या अस्पताल स्टाफ तो मौजूद नहीं मिला, लेकिन बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों के पहुंचने से लोगों को अहसास हो रहा था कि कोई बड़ा हादसा हुआ है। हालांकि घायलों के अस्पताल पहुंचते ही उन्हें तत्काल इमरजेंसी के वार्ड सात में ले जाया गया, जहां डाक्टर और स्टाफ तत्काल हरकत में आ गए।