मुख्यालय से मात्र पच्चीस किलोमीटर दूर पौनी के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में इलाज के लिए मूलभूत सुविधाओं तक का भी टोटा है। इसके चलते आसपास के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि जिले से कुल 29 कर्मचारियों को किसी दूसरी जगह अटैच किया गया है, जिसमें पौनी पीएचसी का ड्राइवर भी शामिल है। परंतु ये लोग वेतन यहां से निकाल रहे हैं।
मौजूदा समय में बीएमओ और नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत लगे हुए डाक्टर के सहारे पीएचसी का काम चल रहा है। फिर भी कुल मिलाकर यहां आने वाले मरीजों का उपचार भगवान भरोसे ही है।
ज्यादातर मरीजों को उपचार की पर्याप्त सुविधा प्राप्त करने के लिए रियासी या फिर सुंदरबनी का रुख करना पड़ता है। पीएचसी में पांचों मेडिकल आफिसर की पोस्ट खाली पड़ी है, जिनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक विशेषज्ञ डॉक्टर, आईसीडीएस, ब्लाक हेडक्वार्टर डाक्टर व डेंटल सर्जन मौजूद ही नहीं है।
इसके अलावा यहां पर अगर किसी को अल्ट्रासाउंड करवाने की जरूरत पडे़ तो उसको किसी दूसरे स्थान पर यानी रियासी या सुंदरबनी जाना पड़ता है। वही एक्स-रे का प्लांट भी छोटा होने के कारण लोगों को ज्यादातर इसके लिए इन्हीं स्थानों पर जाने का विकल्प रहता है, जिसमें समय या रुपया दोनों की बर्बादी होती है।
संबंधित विभाग के सामने सब कुछ होते हुए भी लोगों की परेशानियां कम नहीं हो पा रही है। बीएमओ डॉ. रछपाल सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी कितनी है, इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों के पास है।