मशरूम उत्पादन का स्वरोजगार अपनाकर बनीं आत्मनिर्भर
कारोबार में 25 प्रतिशत से अधिक हुई महिलाओं की भागीदारी
विजय कुमार
उधमपुर। चूल्हा-चौका संभालने वाले हाथ आज मिट्टी से सोना उगा रहे हैं। उधमपुर जिले की महिलाएं मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में न केवल अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, बल्कि वे कई चुनौतियों को पार कर आत्मनिर्भर बनी हैं। उन्होंने साबित किया है कि आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है, ये बात पूरी दुनिया मानती है।
ऊधमपुर जिले में मशरूम उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 25 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उधमपुर में ढिंगरी, बटन और मिल्की मशरूम का उत्पादन किया जाता है। महिलाओं के लिए एक अच्छा घरेलू स्वरोजगार बनकर उभर रहा है। विभागीय सहयोग से इसे अपनाने में महिलाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। हार्टिकल्चर विभाग की मानें तो बीते कुछ सालों में जिले में मशरूम उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। विशेष सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं इस स्वरोजगार से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। काम शुरू करने से पहले बाकायदा उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है।
छटाका किस्म के मशरूम के उत्पादन की तैयारी
विभाग अब महंगी छटाका किस्म के मशरूम के उत्पादन की तैयारी कर रहा है। इस साल विभाग ने एक लाख मशरूम बैग लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अन्य किसानों के साथ बेरोजगार युवाओं और घरेलू महिलाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है। उम्मीद है कि बीते सालों की तुलना में इस वर्ष कारोबार में बढ़ोतरी होगी।
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350 से अधिक महिलाएं विभाग के साथ जुड़ीं
हार्टिकल्चर विभाग मशरूम उत्पादन के लिए लगातार किसानों को जोड़ रहा है। बेराेजेगार युवाओं से लेकर सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। मशरूम विकास अधिकारी विनोद गुप्ता ने बताया कि पहले उधमपुर में गिनी-चुनी महिलाएं ही मशरूम उत्पादन में थीं। आज 350 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। हर साल वे अच्छा मुनाफा कमा रहीं हैं। यह एक कैश क्राॅप है। कोई भी इसे एक छोटी सी जगह पर शुरू कर सकता है। इसके लिए अधिक जमीन भी नहीं चाहिए। प्रशिक्षण से लेकर स्वरोजगार शुरू करने के लिए विभाग हर संभव सहायता करता है। मशरूम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के कारण बाजारों में सालभर इसकी मांग बनी रहती है।
सफलता की कहानी, सफल महिलाओं की जुबानी
-महिलाओं के लिए यह एक अच्छा घरेलू स्वरोजगार है। बहुत सी महिलाएं अच्छी कमाई कर रही हैं। इसी से प्रेरित होकर विभाग की सहायता से बीते साल मशरूम के 200 बैग लगाए थे। इस वर्ष 500 बैग लगाने की योजना है।
-लक्ष्मी देवी (पंचायत पडानू)
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यह एक कैश क्राॅप है। इसे कोई भी बड़ी आसानी से शुरू कर सकता है। विभाग इसके लिए प्रशिक्षण भी देता है। विपणन की भी कोई समस्या नहीं हैं। बीते साल 400 बैग लगाए थे और अच्छी आमदन हुई।
-ज्योति देवी (सीन ब्राह्मणा)
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महिला आत्मनिर्भरता के लिए मशरूम उत्पादन एक अच्छा विकल्प है। दो साल पहले ही इस काम से जुड़ी हूं। अच्छा अनुभव रहा। बीते साल मशरूम के 500 बैग लगाए थे। इस साल और विस्तार की योजना है।
-सुमन वर्मा (पंचायत सनसू)
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मशरूम उत्पादन के स्वरोजगार में बीते साल पहली बार हाथ आजमाया और 300 बैग लगाए थे। अच्छा कारोबार हुआ। किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। इसलिए अब 500 बैग मशरूम लगाने की योजना है।
-अनु देवी (वार्ड 19, संबल)
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साल 2022-23 2023-24 2024-25
मशरूम उत्पादक 569 790 1409
मशरूम बैग 80,000 88,000 98,000
उत्पादन 1758 1623 2377 (क्विंटल में)
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