संवाद न्यूज एजेंसी
पौनी। जिले में माता वैष्णो देवी के बाद शिवखोड़ी धाम सबसे बड़ा धार्मिक स्थान है। पौराणिक कथा के अनुसार गुफा में भगवान शिव साक्षात परिवार सहित विराजमान हैं। बताया जाता है कि गुफा का दूसरा छोर अमरनाथ गुफा में खुलता है। प्राकृतिक गुफा की लंबाई करीब 150 मीटर है जिसमें चार फीट ऊंचा शिवलिंग है। इसके ऊपर पवित्र जल की धारा गिरती रहती है।
कई पिंडियां भी हैं जिन्हें मां पार्वती, भगवान कार्तिकेय और गणपति के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि पिंडियों के रूप में गुफा में विराजित परिवार सहित भोलेनाथ के दर्शन करने पर भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भस्मासुर ने घोर तप कर भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया और उसने वर मांगा कि वह जिस किसी के सिर पर हाथ रखे, वह भस्म हो जाए। प्रभु ने जैसे ही वरदान दिया तो वह उन्हें ही भस्म करने लगा। भस्मासुर से बचने के लिए भोलेनाथ को युद्ध करना पड़ा जो रनसु में हुआ था। कहा जाता है कि रण यानी युद्ध के कारण ही क्षेत्र का नाम रनसु पड़ा। भस्मासुर से पीछा छुड़ाने के लिए भगवान जगह की तलाश करने लगे। तब शिवजी ने पहाड़ों के बीच गुफा बनाई और उसमें छिप गए।
भगवान शिव को इस तरह गुफा में छिपा देख कर भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और भस्मासुर को रिझाने के लिए उसके समीप पहुंच गए। मोहिनी रूप देख कर भस्मासुर सब कुछ भूल गया और प्रेमांध होकर मोहिनी के साथ नृत्य करने लगा। नृत्य के दौरान उसने खुद के ही सिर पर हाथ रख लिया जिससे वह भस्म हो गया। इसके बाद भगवान शिवजी गुफा से बाहर आए। महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय मेले में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।