जिले में धूमधाम से मनाई गई लोहड़ी बाजारों में रही चहल-पहल, शाम होते ही आग जलाकर दिया अर्घ्य
उधमपुर। जिले में लोहड़ी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही छोटे-छोटे बच्चे सुंदर मुदरिए के लोकगीत गाते हुए लोहड़ी मांगने के लिए टोली बनाकर बाजारों में घूमते नजर आए। युवा वर्ग ढोल व हिरण की झांकी के साथ जश्न मनाते और लोहड़ी मांगते नजर आए।
खासतौर पर जिन घरों में नई शादी हुई है या फिर किसी के बच्चे की पहली लोहड़ी है तो वहां पर काफी धूमधाम देखने को मिली। बाजारों में भी काफी चहल-पहल देखी गई। शाम को लोगों ने अपने घरों व बाजारों में दुकानदारों ने लोहड़ी जलाकर मूंगफली, रेवड़ी व अखरोट का अर्घ्य दिया। सुबह रंग-बिरंगे छज्जे बांबोरा जी बांबोरा गीत गाकर लोहड़ी मांगने के लिए एक से दूसरे घर पर जाकर बच्चों ने लोहड़ी मांगी।
शहर में दुकानों व लोगों ने जगह-जगह पर सामूहिक तौर पर लोहड़ी जला कर अर्घ्य दिया। इनके घरों में किसी की शादी या शिशु जन्म के बाद पहली लोहड़ी थी, उनके घरों में उत्सव जैसा माहौल था। ऐसे परिवारों ने रिश्तेदारों और गली मोहल्लों में लोहड़ी बांटी। उधमपुर जिला मुख्यालय के साथ चिनैनी, रामनगर, पंचैरी, लाटी, डुडु व बसंतगढ़ इलाकों में भी लोहड़ी का पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। लोहड़ी के पर्व को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के काफी पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
लोहड़ी पर बाजारों में रही चहल-पहल : लोहड़ी त्यौहार के चलते जहां सोमवार को बाजारों में नागा होता है तो वहीं त्यौहार के चलते ज्यादातर बाजारों में दुकानें खुली रही। खासतौर पर मूंगफली, रेवड़ी, गजक व लोहड़ी का अन्य सामान बेचने वाली दुकानों में काफी भीड़ देखी गई। इसके साथ तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक, मूंगफली, मकई के दानों का भी अर्घ दिया जाता है। शाम होते बाजारों, गली मोहल्लों के चौराहों सहित घरों के भीतर भी लोहड़ी जलाकर अर्घ दिया गया। पंड़ित सुदर्शन कुमार शर्मा ने बताया कि लोहड़ी के अगले दिन मकर संक्रांति का दिन नए साल का पहला दिन होता है। लोहड़ी व मकर संक्रांति में एक दिन का फर्क होता है। पुराने दिनों में एक महीना पहले ही हमारे डुग्गर प्रदेश में त्योहार शुरू हो जाता था। बच्चे इस दौरान दिन में लकड़ी एकत्रित करके रात को लोहड़ी जलाकर अर्घ्य दिया करते थे।
रात को हिरण निकालने का बहुत महत्व होता है। हिरण निकाल कर लोहड़ी मांगने के लिए निकली टोली उन घरों में जाकर नई दुल्हन व नवजात बच्चे को आशीर्वाद देते थे। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि हम लोग 1 जनवरी को नया साल मनाते हैं वह अंग्रेजों की देन हैं, जबकि हमारा नया साल मकर संक्रांति से शुरू होता है। इस दिन लोग अपने घरों मेें खिचड़ी बनाकर अपने कुल देवता को चढ़ाते हैं। संवाद