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बहकर आ रही लकड़ी इकट्ठा करने न जाएं: डीएफओ

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भद्रवाह। भद्रवाह के एक नाले में बहकर आई लड़की: विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
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भद्रवाह। भारी बारिश और बाढ़ से नदी-नालों में जंगलों से बहकर आई लकड़ी और अन्य वन उपज को इकट्ठा करने के लिए लोग जान को जोखिम में डालकर नदी -नालों और चिनाब दरिया किनारे पहुंच रहे हैं। इससे गंभीर हादसे का भी खतरा पैदा हो गया है।
वहीं इसकी रोकथाम को लेकर भद्रवाह वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) देवेंद्र कुमार ने आम जनता से सख्त अपील की है कि वे नदी, नालों और चिनाब नदी के पास बहकर आई लकड़ी या इमारती लकड़ी इकट्ठा करने न जाएं।
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हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ के कारण, बड़ी मात्रा में बहकर आई लकड़ी और अन्य वनोपज नदियों, नालों और आसपास के जलमार्गों में बहकर आ गए हैं। डीएफओ ने आगाह किया कि ऐसे जल निकायों के पास जाना मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है, क्योंकि तेज धाराएं, फिसलन भरे किनारे और पानी का अचानक उफान जानलेवा साबित हो सकता है।
इसके अलावा, डीएफओ ने कहा कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 45 के तहत, जमा की गई या फंसी हुई सभी बहकर आई लकड़ी, इमारती लकड़ी और अन्य वनोपज सरकारी संपत्ति मानी जाती है। ऐसी सामग्री का अनधिकृत संग्रह या कब्ज़ा भारतीय वन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च चिंता है। बहकर आई लकड़ी इकट्ठा करना न केवल जान को खतरे में डालता है, बल्कि वन कानूनों का उल्लंघन भी है। मैं सभी निवासियों से नदी, नालों और चिनाब नदी से दूर रहने और वन विभाग के साथ सहयोग करने की अपील करता हूँ।
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उन्होंने कहा कि वन विभाग ने पहले ही अपने कर्मचारियों और रेंज अधिकारियों को कड़ी निगरानी रखने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही विभाग ने जनता से जिम्मेदारी से काम करने, सुरक्षा को प्राथमिकता देने और वन उपज के अवैध संग्रह के लिए अपनी जान जोखिम में डालने से बचने की अपील की है।
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