किश्तवाड़। चिशोती गांव में 14 अगस्त को आई आपदा में बह गए जिनके घर बह गए, उनके सदस्यों ने गांव के ही अन्य घरों में शरण ली है। अभी तक सरकार ने उनके आश्रय के लिए ठिकाना नहीं बनाया है। कुछ लोगों को टेंट आदि दिए गए हैं।
जिस किसी के घर जाओ वह रो रहा है। उनका कहना है कि बनाए गए आशियाने बह गए। परिवार के सदस्य भगवान को प्यारे हो गए, अब हम क्या करें। जो सामान हमें दिया जा रहा है उसका क्या करेंगे। जब घर ही नहीं रहा। उन्होंने कहा कि कई वर्ष बीत जाते हैं आशियाना बनाने में और अचानक कुछ ही मिनटों में सब बह गया।
उनका कहना है कि सरकार ही कुछ हमारे लिए करेगी तो अच्छा होगा। हमें किसी अच्छी जगह बसाया जाए। कई स्वयं सेवी संस्थाएं राशन, बिस्तर, बर्तन व अन्य सामग्री दे रही हैं लेकिन हमारे पास रखने के लिए जगह ही नहीं है। एक गांववासी सेवा राम का कहना है कि जो कमाया और बनाया था वह बह गया।