उधमपुर। रठियान में संत सुभाष शास्त्री की तरफ से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को सत्संग का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि सत्य केवल परमात्मा है। जो परमात्मा का संग करता है। सही मायने में वही सत्संग करता है।
उन्होंने कथा के आरंभ में बताया कि जीवन में सत्संग का बहुत ज्यादा महत्व है। लेकिन मानव सत्संग का सही मतलब नहीं जानता है। सत्संग का मतलब परमात्मा का संग करना होता है। परमात्मा संग सतगुरु की शरण में जाकर ही हो सकता है। सतगुरु मानव को बताना है कि जीवन में सत्य है। जो कुसंग का संग करता है तो वह अपने लिए परेशानियों और दुख पैदा करता है। कुसंग जहर की तरह होता है। कुसंग करने से मानव गलत राह पर चलता है और फिर एक दिन इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसलिए हमे हमेशा ख्याल रखना चाहिए कि हम किसका संग कर रहे हैं और भविष्य में इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति कुसंग में फंस जाता है तो वह सत्संग में आकर अपने आप को इस जाल से बाहर निकाल सकता है। सत्संग में ही मानव को जीवन जीने की सही राह मिलती है। उन्होंने कहा मानव को सजग रहकर परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए। भक्ति से जीवन में सुख प्राप्त होते है और परिवार में भी सुख शांति का वास होता है।