उधमपुर। माया, धन-दौलत, संपति ठगिनी है। इसने हर युग में सभी ठगा है। धन्य है वह ठग, जिसने इस ठगनी को ठग ले। इच्छाओं पर नियंत्रण रखना ही सुखी जीवन का सार है। यह संदेश संत सुभाष शास्त्री ने रठियान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन संगत को दिया।
उन्होंने कहा कि जो माया रूपी ठग से समय रहते पीछा छुड़ा ले वह धन्य और महान है। माया से पीछा छुड़ाने का सही समय पचास वर्ष की आयु है। इसमें मानव को जीवन की वास्तविक सफलता के लिए यत्न करना चाहिए, जिसके लिए हमें मावन जीवन मिला है। इससे पहले भी होना चाहिए, परंतु इसके पश्चात अवश्य होना चाहिए। माया अर्जित करना जीवन यापन के लिए अति आवश्यक है, लेकिन इसके लिए अंधी दौड़ में नहीं पड़ना है। धन अर्जित करना है धर्मानुसार, आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, न सिर्फ इच्छाओं के लिए। आवश्यकताओं की एक सीमा होती है, जबकि इच्छाएं सीमा रहित होती हैं। इसलिए जितना इच्छाओं पर नियंत्रण रखोगे उतना ही सुखी रहोगे। लेकिन मनुष्य सदैव सुखी व प्रसन्न रहना चाहता है।