उधमपुर। रठियान इलाके में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इससे पहले सुबह संत सुभाष शास्त्री के निर्देशन में कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। महिलाओं ने देविका नदी के तट पर मौजूद बावलियों से जलभर कर कथा स्थल पर पहुंचाया। संत सुभाष शास्त्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने मानव को ज्ञान प्रदान कर भक्ति के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी है।
सुबह करीब 10 बजे रठियान से कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में सबसे आगे महिलाएं सर पर कलश उठाए सबसे आगे चल रही थीं। ग्रामीण व शहरी इलाकों से होकर ढोल नगाड़ों के साथ कलश यात्रा देविका नदी के तट पर पहुंची, जहां सभी ने विधिवत पूजन के बाद कलश में बावलियों का जल भर कर कथा स्थल पर पहुंचाया गया। दोपहर बाद तीन बजे कथा का आगाज हुआ। संत सुभाष शास्त्री ने कथा में बताया कि वेद, शास्त्र और पुराण में अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है। इससे हमारा जीवन तो सुखी होता ही है।
इससे हम समाज को भी सही दिशा प्रदान करते हैं। आज के आधुनिक युग में लोग अनुशासन का पालन न कर सारा जीवन अशांति के साथ व्यतीत कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण ने गीता के तीसरे अध्याय में अर्जुन को समझाया कि कैसे महापुरुष का संग कर मानव अपना आचरण ठीक कर सकता है। महापुरुष जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी उसी तरह से आचरण करते हैं। अपने आचरण को ठीक रखने के लिए हमको हमेशा महापुरुषों का संग करना होगा। कलयुग में अच्छे इंसान का संग करने का एक ही साधन सत्संग हैं। सत्संग में महापुरुष मिलते हैं, जोकि हमको जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं और माया के प्रकोप से दूर रखते हैं।