डोडा। चिनाब घाटी के ऊपरी इलाकों में चल रहे गहन आतंकवाद विरोधी अभियान के बीच सेना डोडा जिले में ग्राम रक्षा गार्डों (वीडीजी) को ट्रेनिंग दे रही है। इससे जमीनी स्तर पर सुरक्षा मजबूत करने के प्रयास भी तेज हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि डोडा-चंबा सीमा के पास 17 दूरदराज के गांवों के लगभग 150 वीडीजी हैं। ये सभी ऑटोमैटिक राइफल चलाने, छोटी-मोटी रणनीति, आत्मरक्षा, बंकर बनाने और दुश्मन के हमलों को रोकने की गहन ट्रेनिंग ले रहे हैं।
ये गांव जंगल और पहाड़ी इलाकों के पास स्थित हैं। यहां सुरक्षा बल संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि यह ट्रेनिंग डोडा जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर भलेसा की शिंगिनी पंचायत में दी जा रही है। इस मकसद वीडीजी को अपने गांवों की रक्षा करने और खासकर कमजोर इलाकों में रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में काम करने के लिए जरूरी हुनर से लैस किया जा सके।
उन्होंने कहा कि यह कदम सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा ऊपरी इलाकों में चलाए जा रहे ऑपरेशन का हिस्सा है। इसका मकसद उन आतंकवादियों का पता लगाना और उन्हें खत्म करना है जो कुछ साल पहले चिनाब घाटी, खासकर डोडा और किश्तवाड़ जिलों में घुसपैठ करने में कामयाब हो गए थे।
शिंगानी के एक वीडीजी सदस्य सुरेंद्र सिंह ने कहा, यह एक बड़ा कार्यक्रम है। इसमें 17 ग्राम रक्षा समूहों के सदस्य एक साथ आए हैं। हमें हथियार चलाने, बंकर बनाने और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है। हमारे दरवाजे पर ऐसी ट्रेनिंग मिलना बहुत सराहनीय है।
उन्होंने इस क्षेत्र में बार-बार होने वाले आतंकवादी हमलों को याद करते हुए सरकार से सदस्यों को और अधिक ऑटोमैटिक हथियार देने का अनुरोध किया।
गौआला गांव के एक अन्य वीडीजी सदस्य राजेश कुमार ठाकुर ने कहा कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से दी गई ट्रेनिंग से उनमें आत्मविश्वास की भावना पैदा हुई है। उन्होंने कहा, पहले हमारे पास सिर्फ़ .303 राइफलें थीं। ऑटोमैटिक हथियार मिलने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। अब हम अपने गांवों की रक्षा करने में सक्षम महसूस करते हैं।
ठाकुर ने यह भी मांग की कि जिन वीडीजी सदस्यों को वेतन नहीं मिला है, उन्हें मानदेय दिया जाए। कहा कि गांवों में बंकर बनने से निवासियों के बीच डर कम हुआ है। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि ऊपरी इलाकों में लगातार ऑपरेशन के साथ-साथ वीडीजी को मजबूत करना एक मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसका मकसद आतंकवादियों को कोई सपोर्ट बेस न देना और इलाके में लंबे समय तक शांति सुनिश्चित करना है।