कटड़ा। नए साल की शुरुआत के साथ ही मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रसिद्ध इंटरनेशनल भजन लेखक अनिल कत्याल ने विशेष वार्ता में बताया कि वे पिछले नौ वर्षों से निरंतर मां वैष्णो देवी के भजन लिख रहे हैं। अब तक वे लगभग 12,500 से अधिक भजनों की रचना कर चुके हैं, जबकि उनका लक्ष्य एक लाख भजन लिखने का है जो केवल माता भगवती की कृपा से ही संभव होगा।
अनिल कत्याल ने कहा कि जो कुछ भी वे लिखते हैं वह माता रानी की प्रेरणा और कृपा से ही लिखते हैं। उनके लिखे भजन मां वैष्णो देवी भवन और अर्धकुंवारी मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली दिव्य आरती में नियमित रूप से गाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त देशभर में आयोजित माता के जागरण और चौकियों में भी उनके लिखे भजन श्रद्धालुओं के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मां सरस्वती ज्ञान और सुख प्रदान करती हैं, मां लक्ष्मी भक्तों के भंडार भरती हैं और मां काली कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मां का प्रेम ही सच्चा प्रेम है, जिसे पाने से मन और आत्मा शीतल हो जाते हैं। श्रद्धा भाव से माता के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
दिल्ली के पहाड़गंज, डोर वाली गली के निवासी अनिल कत्याल बचपन से ही मां वैष्णो देवी के दरबार में आते रहे हैं। वर्ष 2016 से उन्होंने भजन लेखन की यात्रा शुरू की जो आज भी निरंतर जारी है। उनके लिखे भजन धार्मिक स्थलों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान बना चुकी हैं। अनिल कत्याल द्वारा लिखित “वैष्णो आराधना” नामक आठ पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें वे मां के भक्तों को निशुल्क भेंट स्वरूप प्रदान करते हैं।
नए वर्ष के अवसर पर उनके द्वारा लिखे गए भजन —
सानु मईया जी ने पाईयां चिट्ठियां…
संगता दरबार जा रेयां…
लैण नवें साल दी खुशियां…”
कत्याल ने भावुक होते हुए कहा कि वे स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं कि मां वैष्णो देवी ने उन्हें इस पावन सेवा के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि जब तक माता रानी की कृपा बनी रहेगी। वे भजन लेखन का यह सेवा कार्य निरंतर जारी रखेंगे।