उधमपुर। आजकल युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में रसौली की समस्या देखने को मिल रही है। शरीर में बनने वाली यह गांठ कई बार सामान्य होती है लेकिन कुछ मामलों में गंभीर बीमारी का संकेत भी बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और जांच से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रसौली शरीर के किसी हिस्से में बनने वाली असामान्य गांठ होती है, जो कोशिकाओं के जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण बनती है। यह त्वचा, गर्दन, स्तन, गर्भाशय, पेट, लिवर, मस्तिष्क या शरीर के अन्य अंगों में हो सकती है। अधिकांश रसौलियां कैंसर युक्त नहीं होतीं लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती हैं।
महिलाओं में गर्भाशय की रसौली यानी फाइब्रॉइड अधिक देखने को मिलती है जबकि पुरुषों और महिलाओं दोनों में त्वचा या शरीर के अन्य हिस्सों में सिस्ट और गांठें विकसित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार रसौली होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हार्मोन में बदलाव, आनुवंशिक कारण, संक्रमण, बढ़ती उम्र, मोटापा और शरीर की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार रसौली का सही कारण पता नहीं चल पाता।
लक्षण
रसौली के लक्षण उसके स्थान और आकार पर निर्भर करते हैं। शरीर में किसी जगह गांठ महसूस होना, सूजन, दर्द, भारीपन, लगातार असहजता, वजन कम होना या प्रभावित अंग के काम में परेशानी इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। हालांकि कई बार रसौली बिना किसी लक्षण के भी विकसित हो सकती है। जांच के दौरान इसका पता चलता है।
सावधानियां
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूरी है। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मामलों में रसौली से होने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है।
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डाॅ. सुदेश रैना, चिकित्सक
शरीर में किसी भी नई गांठ या सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि गांठ का आकार बढ़ रहा हो, दर्द हो रहा हो या अन्य परेशानी हो रही हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इससे समय रहते बीमारी को रोका जा सकता है।
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डाॅ. मोहिंद्र सिंह, चिकित्सक