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Udhampur News: बस स्टाफ की जिद और लापरवाही ने उजाड़ दिए कई घर

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उधमपुर। उधमपुर-रामनगर बस हादसे में घायल यात्रियों ने बस स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों के अनुसार चालक और सहचालक मना करने के बावजूद लापरवाही बरतते रहे और टोकने पर सवारियों से झगड़ा करने लगे। इस हादसे में अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और जीएमसी उधमपुर में भर्ती 29 घायल अभी भी उस खौफनाक मंजर के सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं।
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जीएमसी उधमपुर में 39 घायल इलाज के लिए भर्ती थे जिनमें से अब 29 का इलाज जारी है। 10 को छुट्टी दे दी गई है। जीएमसी में भर्ती घायल हादसे से सदमे में हैं। किसी ने अपने माता-पिता खो दिए तो किसी का बच्चे उनसे छिन गया। रोजमर्रा के काम के लिए निकले लोग इस दर्दनाक घटना का शिकार बन गए। पीड़ितों ने बताया कि बार-बार मना करने पर भी चालक व सहचालक नहीं मान रहे थे।
जीएमसी में भर्ती रामनगर के कटवालत निवासी रजनी देवी ने बताया कि वह स्कूल में कुछ दस्तावेज देने जा रही थी। यहां घर से थोड़ी ही दूरी पर बस हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि बस में काफी भीड़ थी। बस में वह बीच में बैठी थी। इससे कम चोटें आई हैं। सिर्फ गर्दन में चोट लगी है। रजनी ने बताया कि उनके गांव के दो लोग उनके साथ सफर कर रहे थे। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे का मंजर याद कर दिल घबरा जाता है।
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इस बस के अलावा सुबह कोई दूसरा साधन नहीं था
कनाह रामनगर निवासी मनीषा देवी अपनी मां के साथ उधमपुर जा रही थीं। इस बस के अलावा सुबह कोई दूसरा साधन नहीं था। काम जरूरी था इसलिए जल्दी पहुंचने के चक्कर में बस में सवार गईं। उन्होंने बताया कि बस में खड़े होने तक की जगह नहीं थी। हादसे में हम दोनों की बाजू फ्रैक्चर हो गई लेकिन अब हालत स्थिर है, जिंदगी में ओवरलोड बस पर कभी सपने में भी सफर करने का नहीं सोचेंगे।
मानने को तैयार नहीं था सह चालक

कघोट निवासी सचिन ने बताया कि बस में जरूरत से ज्यादा भीड़ थी। कई बार सह चालक को सवारियां चढ़ाने के लिए मना किया गया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। कई सवारियों ने भी कहा कि बस में जगह ही नहीं है और सवारी मत चढ़ाओ लेकिन चालक व सह चालक लड़ने पर आ जाते थे। भीड़ के बाद भी लगातार सवारी चढ़ाते रहे।
मनमाने तरीके से बस चलाता था नया चालक
कुछ घायलों ने बताया कि पहले इस बस का चालक अनुभवी था लेकिन कुछ दिनों से यह नया व्यक्ति बस चला रहा था। वह अच्छे से बस चलाना नहीं जानता था। कई बार लोगों की चीखे निकल जाती थी लेकिन चालक अपनी मनमानी करता रहता था। जरूरत के समय पर यही गाड़ी उपलब्ध होने की वजह से मजबूरी में उन्हें इसी बस पर सवार होना पड़ता था।
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