उधमपुर। शहर के बस स्टैंड पर लगी रेहड़ियां
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उधमपुर। नगर परिषद की तरफ से वर्ष 2006 के बाद नए रेहड़ी फड़ी लाइसेंस जारी नहीं किए जाने और नियमित रेहड़ी जोन स्थल उपलब्ध न होने के कारण शहर में अवैध रेहड़ी-फड़ी संचालकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नगर परिषद के अनुसार वर्तमान में 1500 रेहड़ी फड़ी संचालित हो रही हैं। इनमें करीब 500 को छोड़ कर सभी बिना लाइसेंस के हैं। इससे शहर के प्रमुख बाजारों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नगर परिषद उधमपुर के अंतर्गत 21 वार्ड आते हैं। परिषद के रिकार्ड में 500 लाइसेंसधारी रेहड़ी फड़ी संचालक दर्ज हैं। इसके विपरीत शहर में एक हजार से अधिक रेहड़ी फड़ी संचालित हो रही हैं। इनमें लगभग एक हजार बिना लाइसेंस के लगाई जा रही हैं। सलाथिया चौक से रामनगर चौक, गोल मार्केट, टाउन हाल से बस स्टैंड रोड और मुख्य बस स्टैंड जैसे व्यस्त क्षेत्रों में अव्यवस्थित तरीके से लगी रेहड़ियों के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, रेहड़ी फड़ी संचालकों का कहना है कि उनकी आजीविका का यही एकमात्र साधन है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन उन्हें वैध लाइसेंस और निर्धारित स्थान उपलब्ध कराए तो वे नियमों का पालन करते हुए अपना कारोबार करने के लिए तैयार हैं।
कोट
अवैध रेहड़ी फड़ी से लोगों को परेशानी होती है लेकिन इन लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखना जरूरी है। नगर प्रशासन इनके लिए वार्ड स्तर पर चिन्हित स्थानों पर व्यवस्था करे।
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जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल
नगर परिषद के सीईओ के साथ हुई बैठक में रेहड़ी-फड़ी संचालकों को अलग-अलग जोन में व्यवस्थित करने और नए लाइसेंस जारी करने पर सहमति बनी थी। प्रशासन से इस निर्णय को जल्द लागू करने की मांग की है।
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यशपाल गुप्ता, अध्यक्ष, रेहड़ी यूनियन
रोजगार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहर आ रहे हैं। इससे व्यवस्था बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। दिन-प्रतिदिन अवैध रेहड़ी संचालकों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोगों से अपील है कि अन्य रोजगार के साधनों को भी अपनाएं। बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर रेहडि़यां लगाने से शहर की व्यवस्था प्रभावित होती है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सामान भी जब्त करना पड़ता है। इससे सबसे अधिक नुकसान अवैध रेहड़ी संचालकों को ही उठाना पड़ता है।
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सद्दाम हुसैन, सीईओ, नगर परिषद