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Udhampur News: भद्रवाह के छोटे से गांव से जम्मू के मंदिरों तक पहुंच रहे रफाकत के खेतों के फूल

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भद्रवाह। जम्मू-कश्मीर की भद्रवाह घाटी के एक छोटे से गांव से शुरू हुई गेंदा फूलों की खेती आज जम्मू के मंदिरों तक पहुंच रही है। सफलता की यह कहानी कृषि में बदलाव, मेहनत, सामुदायिक सहयोग, सामाजिक सौहार्द और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई संभावनाओं की मिसाल बन गई है।
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भद्रवाह घाटी, जिसे ‘मिनी कश्मीर’ के नाम से जाना जाता है, के गजोठ पंचायत के किसान रफाकत हुसैन शेख (43) ने वर्ष 2010 में पारंपरिक धान और मक्के की खेती छोड़कर गेंदा फूल की खेती शुरू की। उस समय उनके पास खेती के लिए जमीन का एक छोटा टुकड़ा था, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। फ्लोरीकल्चर विभाग की ओर से मिले मुफ्त बीज और प्रोत्साहन ने उन्हें फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

रफाकत के लिए यह बदलाव आसान नहीं था। पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाने के उनके फैसले का ग्रामीणों के साथ-साथ परिवार के कुछ सदस्यों ने भी विरोध किया लेकिन पहले ही वर्ष गेंदा की अच्छी फसल हुई और उन्होंने करीब 15 हजार रुपये की कमाई की। यह उनकी पिछली कृषि आय की तुलना में उल्लेखनीय बदलाव था। इससे पहले उनकी अधिकतम आय लगभग पांच हजार रुपये तक ही सीमित थी।
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इस सफलता से उत्साहित रफाकत ने बाद में गांव के लोगों से 30 कनाल कम उपजाऊ जमीन किराये पर लेकर गेंदा की खेती का विस्तार किया। आज वह फूलों की खेती से सालाना औसतन चार से पांच लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। रफाकत के अनुसार उनकी सफलता को देखकर आसपास के किसानों ने भी पारंपरिक खेती के बजाय फ्लोरीकल्चर को अपनाना शुरू किया। उनका दावा है कि गजोठ क्षेत्र में अब करीब 400 से 500 किसान फूलों की खेती से जुड़ चुके हैं। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि जमीन मालिकों को भी किराये के रूप में अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

जिला फ्लोरीकल्चर अधिकारी अर्जुन परिहार ने रफाकत की सफलता को क्षेत्र में फूलों की खेती के विस्तार में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रफाकत ने वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती पर भरोसा किया और उनकी सफलता से प्रेरित होकर सैकड़ों अन्य किसान भी गेंदा उगाने लगे। फ्लोरीकल्चर विभाग केंद्र सरकार के फ्लोरीमिशन के तहत गजोठ के किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीक, बीज और बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।

जम्मू के मंदिरों तक पहुंच रहे फूल

गजोठ में तैयार होने वाले गेंदा के फूल रोजाना ट्रकों के जरिए पहाड़ी रास्तों से जम्मू के बाजारों तक पहुंचते हैं। इन फूलों की मंदिरों में काफी मांग है। यहां पहुंचने के बाद फूलों से बड़ी-बड़ी मालाएं तैयार की जाती हैं और उन्हें पूजा-अर्चना के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जम्मू के रघुनाथ मंदिर और बाहू किला में बावे वाली माता मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी इन फूलों का इस्तेमाल होता है। इस कारोबार ने भद्रवाह के किसानों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार तथा उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए हैं।
''''मरिगोल्ड कैपिटल'''' के रूप में पहचान
भद्रवाह पहले से ही लैवेंडर की खेती के लिए चर्चित है और इसे भारत की ''''पर्पल रेवोल्यूशन'''' से भी जोड़ा जाता है। अब गेंदा की व्यावसायिक खेती ने क्षेत्र के फ्लोरीकल्चर को एक नया आयाम दिया है। गजोठ पंचायत को जम्मू-कश्मीर में गेंदा उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान मिल रही है और इसे ''''मरिगोल्ड कैपिटल ऑफ जम्मू-कश्मीर'''' कहा जाने लगा है।
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