उधमपुर। ब्लॉक पंचैरी में 8 सितंबर से शुरू हुआ तीन दिवसीय ऐतिहासिक सांकरी देवता मेला वीरवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने भाग लिया। केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने संकरी देवता मंदिर में पूजा-अर्चना कर देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मेले के समापन समारोह में जिला उपायुक्त मिंगा शेरपा, एसएसपी अमृतपाल सिंह, पीओ पोषण सुभाष डोगरा, मेला अधिकारी एवं तहसीलदार पंचैरी विपिन कुमार के अलावा पूर्व पीआरआई सदस्य, प्रमुख नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी गणमान्य व्यक्तियों ने सांकरी देवता के पवित्र मंदिर में माथा टेका और क्षेत्र में शांति, समृद्धि एवं लोगों के सुख-समृद्धि की कामना की।
समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मिंगा शेरपा ने पारंपरिक मेले के सफल आयोजन के लिए पंचैरी के लोगों और मेला समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के पारंपरिक मेले क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे, सौहार्द और आपसी समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपायुक्त ने क्षेत्र की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा उनके प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे पारंपरिक मेले स्थानीय संस्कृति और विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।
बाद में उपायुक्त ने मेला स्थल का विस्तृत दौरा कर विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और सेवाओं के बारे में जानकारी दी जा रही थी।
इस दौरान पूर्व पीआरआई सदस्यों और स्थानीय लोगों ने क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों और मांगों को उपायुक्त के समक्ष रखा। उपायुक्त ने उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि जायज मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
मेले के सफल और सुचारु आयोजन के लिए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा, पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
मेले के दौरान प्रसिद्ध कलाकारों, स्थानीय कलाकारों, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा आसपास के क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विषय आधारित नुक्कड़ नाटक पेश किए। इन प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और कलाकारों का तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया।
मेले में विभिन्न विभागों के स्टॉलों के अलावा मिठाइयों, खिलौनों और खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रहे। तीन दिनों तक चले इस ऐतिहासिक मेले ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था और समृद्ध लोक संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।