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Udhampur News: उधमपुर की कलाड़ी को मिलेगी नई पहचान, महिलाओं के हाथों में कारोबार की कमान

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उधमपुर। जिला उधमपुर की मशहूर पारंपरिक कलाड़ी अब घरों और गांवों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे बड़े बाजार तक पहुंचाने और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में पंचायत कोटली बाला में ‘वृंदा कलाड़ी’ नाम से कलाड़ी की नई प्रसंस्करण और ब्रांडिंग इकाई शुरू की गई है। कलाड़ी की इस औपचारिक, स्वच्छ और मशीन आधारित प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन जिला उपायुक्त मिंगा शेरपा ने किया।
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यह इकाई वृंदा कोऑपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड के तहत संचालित होगी। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह महिलाओं की सहकारी संस्था है। इसकी सभी सदस्य महिलाएं हैं और कलाड़ी के उत्पादन से लेकर उसकी पैकेजिंग और आगे बाजार तक पहुंच बनाने में उनकी अहम भूमिका रहेगी। इस तरह यह उधमपुर में महिलाओं के नेतृत्व वाला कलाड़ी का पहला सहकारी ब्रांड बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके पारंपरिक हुनर के जरिए रोजगार और स्थायी आय का अवसर उपलब्ध कराना है।
घरों से बाजार तक पहुंचेगी उधमपुर की कलाड़ी
उधमपुर में कलाड़ी बनाने की परंपरा कई वर्षों पुरानी है। स्थानीय परिवार लंबे समय से इसे पारंपरिक तरीके से तैयार करते आ रहे हैं। हालांकि घरेलू स्तर पर बनने वाली कलाड़ी की कम शेल्फ लाइफ और सीमित बाजार के कारण यह उत्पाद बड़े स्तर पर नहीं पहुंच पाया। ‘वृंदा कलाड़ी’ का उद्देश्य उधमपुर की सदियों पुरानी पारंपरिक कलाड़ी बनाने की कला को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक और स्वच्छ उत्पादन पद्धतियों से जोड़ना है। इसका लक्ष्य कलाड़ी की शेल्फ लाइफ को कम से कम 21 दिन तक करना है। इस पहल का बड़ा उद्देश्य कलाड़ी को केवल घरों में बनने वाले पारंपरिक उत्पाद के रूप में सीमित न रखकर उसे औपचारिक, स्वच्छ, प्रमाणित और ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाना है। आगे चलकर उधमपुर की इस पारंपरिक चीज को देश के अलग-अलग हिस्सों के बाजारों तक पहुंचाने की योजना है।
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महिलाओं को मिला अपने हुनर को कारोबार में बदलने का मौका

‘वृंदा कलाड़ी’ की पूरी व्यवस्था महिलाओं की सहकारी संस्था के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है। जिला अधिकारियों ने महिला सदस्यों को मशीनों के इस्तेमाल, गुणवत्ता बनाए रखने और जरूरी दस्तावेज तैयार करने में लगातार मार्गदर्शन दिया। इससे महिलाओं को घर पर पारंपरिक तरीके से कलाड़ी बनाने से आगे बढ़कर एक व्यवस्थित और नियमों के अनुरूप कारोबार चलाने का अवसर मिला है।
इस परियोजना की परिकल्पना और शुरुआत डॉ. शगुन सिंह ने की है। परियोजना को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी के सेंटर फॉर कोऑपरेटिव्स एंड लाइवलीहुड्स (सीसीएल) की सीड फंडिंग पहल के तहत सहायता मिली है। जिला प्रशासन उधमपुर के सहयोग से इसे आगे बढ़ाया गया है।
इसमें पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग और रोजगार सृजन विभाग का भी सहयोग रहा है। इंटीग्रेटेड डेयरी डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस), मिशन युवा, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का लाभ भी इस पहल के लिए लिया गया है।
कलाड़ी से पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
उद्घाटन के दौरान उपायुक्त मिंगा शेरपा ने कहा कि कलाड़ी केवल एक खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि उधमपुर की पहचान और संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसे ब्रांड के रूप में विकसित करने से जिले में पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। कलाड़ी को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ यानी ओडीओपी के तहत आगे बढ़ाने की भी अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शोध संस्थानों द्वारा कलाड़ी की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और इसके मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन प्रयासों से भविष्य में कलाड़ी की पहुंच देश के दूसरे हिस्सों के साथ-साथ निर्यात बाजारों तक भी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण लोगों, खासकर महिलाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। ‘वृंदा कलाड़ी’ इसी दिशा में एक अच्छा उदाहरण है, जहां महिलाओं को उनके पारंपरिक हुनर को कारोबार में बदलने का अवसर मिल रहा है।
जीआई टैग से मिली पहचान, अब ब्रांडिंग की तैयारी
उल्लेखनीय है कि कलाड़ी को उधमपुर के नाम से जीआई टैग प्राप्त है। यह इसकी विशिष्ट क्षेत्रीय पहचान और पारंपरिक महत्व को दर्शाता है। अब ‘वृंदा कलाड़ी’ के जरिए इसकी ब्रांडिंग और सहकारी स्तर पर मार्केटिंग की शुरुआत होने से स्थानीय महिला उत्पादकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना के पूरी तरह संचालित होने के बाद ‘वृंदा कलाड़ी’ उधमपुर और भारत में सहकारी ढांचे के तहत कलाड़ी के प्रसंस्करण और बाजार ब्रांडिंग का पहला ऐसा मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, जहां दोनों काम एक ही सहकारी संरचना के अंतर्गत किए जाएंगे। इसका लक्ष्य उधमपुर की कलाड़ी के स्वाद और विरासत को जिले से बाहर देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाना है।
दूसरे पारंपरिक उत्पादों के लिए भी बन सकता है मॉडल
उद्घाटन कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों और सहकारी संस्था की महिला सदस्यों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि वृंदा सहकारी मॉडल उधमपुर और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में अन्य पारंपरिक और स्थानीय खाद्य उत्पादों को भी व्यवस्थित कारोबार और बाजार से जोड़ने के लिए एक उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
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