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ग्रामीण सड़कों पर मानसून की मार : कहीं दलदल में धंस रहे वाहन, कहीं भूस्खलन से थम रही रफ्तार

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उधमपुर। मानसून के दौरान सड़कों को सुचारु बनाए रखने के प्रशासनिक दावों के बावजूद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। जगह-जगह बदहाल सड़कें, दलदल में तब्दील मार्ग और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भूस्खलन ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे अधिक परेशानी दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है, जहां रोजमर्रा की आवाजाही किसी चुनौती से कम नहीं रह गई है।
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जिले में पिछले वर्ष मानसून के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कुल 240 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं। इनमें से अब तक केवल 108 सड़कों पर ही स्थायी बहाली का कार्य पूरा हो पाया है, जबकि 132 सड़कें आज भी स्थायी मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में इन मार्गों पर सफर करना लोगों के लिए जोखिम भरा बना हुआ है। हालिया बारिश के दौरान काल्डी, बरमीन, पंचैरी, मौंगरी, रामनगर और लाटी सहित कई दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ा है और इन सड़कों पर सफर अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

प्रभावित इलाकों से संबंधित संदूर सिंह, विश्व प्रताप, पवन कुमार, भारत भूषण, सतीश कुमार व अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान कई ग्रामीण सड़कें कीचड़ और दलदल में बदल जाती हैं। हालात ऐसे बन जाते हैं कि छोटे-बड़े वाहनों के पहिए कीचड़ में धंस जाते हैं और वाहन घंटों तक वहीं फंसे रहते हैं। कई बार यात्रियों को वाहन से उतरकर पैदल रास्ता तय करना पड़ता है, जबकि दूसरे वाहनों को भी लंबे समय तक रुकना पड़ता है। इससे घंटों तक जाम जैसी स्थिति बनी रहती है और लोगों का कीमती समय बर्बाद होता है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के बाद भी भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। मलबा सड़क पर आने से यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है और सड़क खुलने तक लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार राहत टीमों के पहुंचने और मलबा हटाने में समय लगने के कारण लोगों को लंबे समय तक रास्ते में ही फंसे रहना पड़ता है। इन हालातों का सबसे अधिक असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों, व्यापारियों तथा आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ रहा है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई होती है, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मजदूरों व कर्मचारियों को समय पर कार्यस्थल तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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कोट
पिछले वर्ष विभाग की 129 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं। इनमें से 80 सड़कों की स्थायी बहाली पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 49 सड़कों पर काम जारी है। मानसून के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्रों में राहत दलों और मशीनरी को पहले से तैनात रखा गया है। जहां भी भूस्खलन या सड़क अवरुद्ध होने की सूचना मिलती है, वहां तत्काल राहत एवं बहाली कार्य शुरू कर यातायात सामान्य बनाने का प्रयास किया जाता है।
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सुनील ठुसु, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग, उधमपुर

बीते साल उधमपुर डिविजन में पीएमजीएसवाई की 111 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं, जिनमें से 28 सड़कों की स्थायी बहाली पूरी हो चुकी है। शेष सड़कों पर निर्धारित कार्यक्रम के तहत कार्य जारी है और सितंबर तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में टीमें और मशीनरी अलर्ट पर हैं।
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-अत्ता मोहम्मद, एक्सईएन, पीएमजीएसवाई, उधमपुर
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