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Udhampur News: बांस शिल्प से आत्मनिर्भर बनकर मीना ने 30 से अधिक युवतियों को दिया रोजगार का हुनर

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उधमपुर। शहर के नगरोटा क्षेत्र की रहने वाली बांस शिल्पकार मीना देवी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन चुकी हैं। बांस से घरेलू उपयोग एवं सजावटी वस्तुएं तैयार कर उन्होंने न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि 30 से अधिक युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की राह भी दिखाई है।
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मीना देवी के अनुसार उन्होंने वर्ष 2018 में जिला प्रशासन के सहयोग से बांस शिल्प का कार्य शुरू किया था। शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी और सीमित बाजार जैसी चुनौतियां थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने इस पारंपरिक कला को रोजगार का सफल माध्यम बना लिया। मीना देवी बांस से लैंप, ट्रे, टोकरियां, फ्लावर वास, पेन स्टैंड, फ्लैग स्टैंड सहित घरेलू उपयोग और सजावट से जुड़े अनेक आकर्षक उत्पाद तैयार करती हैं। उनके उत्पादों की स्थानीय बाजार के साथ-साथ विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में भी अच्छी मांग रहती है।

उनके मुताबिक समय-समय पर जिला प्रशासन और जम्मू-कश्मीर सरकार की विभिन्न योजनाओं से उन्हें सहयोग मिला। कारखानदार योजना के तहत आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, ऋण और मार्केट लिंकेज जैसी सुविधाएं मिलने से उनके काम को नई गति मिली। आधुनिक उपकरणों के उपयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ी, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई।
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मीना देवी के पति बिशन दास भी इस कार्य में उनका पूरा सहयोग करते हैं। दोनों मिलकर पारंपरिक बांस शिल्प को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं।
मीना देवी का कहना है कि बांस शिल्प ऐसा घरेलू व्यवसाय है, जिसे कम लागत में शुरू किया जा सकता है। यदि उचित प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध हो तो इससे अच्छी आजीविका अर्जित की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने क्षेत्र की 30 से अधिक युवतियों को इस कला का प्रशिक्षण दिया ताकि वे भी स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और पारंपरिक बांस शिल्प को नई पहचान दिलाना है।
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