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Udhampur News: जनप्रतिनिधित्व से लोक कला और खेल तक उधमपुर की बेटियां बना रहीं नई पहचान

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उधमपुर। पहाड़ी और ग्रामीण परिवेश के लिए पहचाने जाने वाले उधमपुर जिले में पिछले तीन दशकों में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। 1990 के दशक में जहां ग्रामीण महिलाएं मुख्यतः घर, पशुपालन और खेतिहर श्रम तक सीमित थीं। आज वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए नई पहचान गढ़ रही हैं। जनप्रतिनिधित्व, समाज सेवा, कानून, स्वरोजगार, लोक कला और खेल के साथ हर क्षेत्र में जिले की बेटियों ने यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर वे किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकती हैं।
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जनप्रतिनिधि बनकर बनाई अलग पहचान

जमीनी राजनीति और पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी ने विकास की दिशा को नया आयाम दिया है। ब्लॉक घोरड़ी की पूर्व बीडीसी चेयरमैन आरती शर्मा (35) ने अपने कार्यकाल में ग्रामीण विकास और जनसमस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। ब्लॉक लाटी- मरोठी की डीडीसी अशरी देवी,(42) दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, पानी और सामाजिक कल्याण योजनाओं को गति देने के लिए जानी जाती हैं। चुल्हे से चौपाल तक सफर तय करने वाली इन महिला जनप्रतिनिधियों ने यह संदेश दिया है कि निर्णय लेने वाली भूमिका में महिलाएं समाज की दिशा बदल सकती हैं।
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समाज सेवा की सशक्त मिसाल
शहर के वार्ड एक की पूर्व पार्षद प्रीति खजुरिया ने सामाजिक सरोकारों में अपनी अलग पहचान बनाई है। बीते साल उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला एनजीओ इनर व्हील के डिस्ट्रिक्ट 307 की चेयरमैन चुना गया है। जनहित के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखने वाली प्रीति खजुरिया ने हालिया बाढ़ और बारिश की प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। शहर में पहला ''''''''''''''''हेल्थ एटीएम'''''''''''''''' स्थापित करवाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है, जिससे आम नागरिकों को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिली है।
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जरूरतमंद महिलाओं के लिए इंसाफ की आवाज
एडवोकेट सुहानी कटोच समाज सेवा के क्षेत्र में जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा की किरण बन चुकी हैं। 2018 से लेकर अब तक वे 1000 से अधिक महिलाओं को निशुल्क कानूनी परामर्श और आवश्यक सहायता प्रदान कर इंसाफ के द्वार तक पहुंचा चुकी हैं। घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और महिला उत्पीड़न जैसे मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका सराहनीय रही है।
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स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की मिसाल
पंचायत सुलगार की सुनीता देवी ने पारंपरिक पशुपालन को व्यावसायिक डेयरी फार्म में बदलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। दो पशुओं से शुरू हुआ उनका सफर आज एक दर्जन गौ-पालन तक पहुंच चुका है। प्रतिदिन लगभग 70 लीटर दूध उत्पादन कर वे सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं और अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसी तरह कोकून उत्पादन, मशरूम उत्पादन, डेयरी उत्पादन और स्वयं सहायता समूहों के तहत घरेलू स्वरोजगार से महिलाएं स्वयं को सशक्त बनाकर चूल्हे से चौपाल और जन प्रतिनिधित्व तक का सफर तय कर रहीं हैं।

डुग्गर लोक कला की आधार स्तंभ

रामनगर की कालो देवी (62) डोगरी लोक गायन और नृत्य की सशक्त पहचान हैं। 12 वर्ष की आयु में शुरू हुआ उनका कला सफर पांच दशकों से अधिक समय से जारी है। उस दौर में जब लड़कियों के घर से बाहर निकलने पर भी सामाजिक पाबंदियां थीं, उन्होंने साहस और जुनून से लोक कला को जीवित रखा। आज भी उनकी गायकी और नृत्य के लाखों प्रशंसक हैं।

खेल और वर्दी में बेटियों का दम
उधमपुर की रिया महाजन (23) ने पारंपरिक बाधाओं को तोड़कर पावर लिफ्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई है। साल 2023 में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर उन्होंने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया। इसी क्रम में जिले की एक और बेटी निलाक्षी शर्मा, साल 2024 में इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) में चयनित होकर कठिनतम चुनौतियों का सामना करने वाली इस प्रतिष्ठित बल में जगह बनाने वाली पहली महिला बनी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
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