उधमपुर। जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज बने एसोसिएटेड गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) उधमपुर की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार रात इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे एक मरीज की समय पर उपचार न मिलने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज को बचाया जा सकता था, लेकिन डॉक्टरों की गैरहाजिरी के कारण जरूरी इलाज समय पर नहीं मिल पाया। मृतक की पहचान संजय कुमार गुप्ता पुत्र ओम प्रकाश फेरिया निवासी वार्ड 20, संगूर के रूप में हुई है।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक पवन गुप्ता ने प्रशासनिक अमले के साथ जीएमसी उधमपुर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ तहसीलदार जय सिंह और एसएचओ पूरब सिंह भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी। इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात अधिकांश डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। पूरी इमरजेंसी केवल एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के सहारे चलती पाई गई, जबकि अन्य वरिष्ठ और जिम्मेदार डॉक्टर नदारद थे। करीब डेढ़ घंटे तक विधायक जीएमसी में धरना लगाकर बैठे रहे और रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी पर तैनात डाक्टरों को बुलाते रहे, लेकिन फिर भी डाॅक्टरों की मौजूदगी पूरी तरह से संभव नहीं हो पाई।
विधायक ने गैरहाजिर डॉक्टरों की सूची तलब की
विधायक पवन गुप्ता ने इस लापरवाही को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि जीएमसी जैसे बड़े संस्थान की इमरजेंसी सेवाएं इस तरह भगवान भरोसे नहीं छोड़ी जा सकतीं। उन्होंने कहा कि जब मरीज जान बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल आता है और उसे डॉक्टर ही न मिलें, तो यह सीधी-सीधी आपराधिक लापरवाही है। विधायक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से रोस्टर की जांच की और गैरहाजिर डॉक्टरों की सूची तलब की। जीएमसी की पूरी इमरजेंसी मात्र एक जूनियर रेजिडेंट डाक्टर के सहारे चलती पाई गई है लेकिन वो भी रोस्टर सूची में शामिल नहीं हैं बल्कि किसी दूसरे डाॅक्टर की गैर मौजूदगी में बुलाई गई थी।
कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी
विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि इस संबंध में एक दो दिन के भीतर संबंधित विभागों और जीएमसी प्रशासन के साथ एक अहम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
जवाबदेही तय की जाएगी
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा तोड़ती हैं, बल्कि गरीब और आम मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। विधायक ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में डॉक्टरों की गैर मौजूदगी के कारण किसी भी मरीज की जान न जाए, इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तय की जाएगी। इस घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में भारी रोष है, वहीं जीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।