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Udhampur News: बालिग बेटी की पिता से भरण-पोषण की मांग, कोर्ट ने याचिका खारिज की

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उधमपुर। जिला ज्यूडिशियल मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक बेटी की तरफ से भरण-पोषण की मांग को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बालिग अविवाहित बेटी शारीरिक या मानसिक असामान्यता या चोट से पीड़ित नहीं है, वह सेक्शन 125 सीआरपीसी के तहत अपने पिता से भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है।
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याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके पिता ने उसे छोड़ दिया और उसकी उपेक्षा की और उसका भरण-पोषण करने से इंकार कर दिया। उसने यह भी कहा कि उसकी मां बूढ़ी है और वह उसका भरण-पोषण करने में असमर्थ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके पिता लापरवाह थे और 2005 से कभी भी उसका भरण-पोषण नहीं किया। कहा कि जब वह 7 साल की थी तब उसकी मां को छोड़ दिया था। उसकी मां ने बुढ़ापे के कारण असमर्थ होने तक उसकी शिक्षा और जरूरतों का ख्याल रखा। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रतिवादी प्रति माह 1,00,000 रुपये से अधिक कमाता है, और शादी तक उसका भरण-पोषण करने के लिए कर्त्तव्यबद्ध है। उसने अंतरिम भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 20,000 रुपये की मांग की।

प्रतिवादी ने आवेदन की स्वीकार्यता के खिलाफ तर्क दिया। जिसमें आपत्ति यह थी कि याचिकाकर्ता, एक वयस्क होने के नाते, धारा 144 बीएनएसस के तहत भरण-पोषण का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। प्रतिवादी ने कहा कि उसने और याचिकाकर्ता की मां ने 2008 में तलाक ले लिया था और उसने पहले याचिकाकर्ता की शादी के खर्च के लिए याचिकाकर्ता की मां को 8,00,000 रुपये का भुगतान किया था, जबकि उसकी कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं थी।
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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि बालिग होने के बावजूद एक अविवाहित बेटी जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है। मेंटेनेंस की हकदार है।

कोर्ट ने अभिलाषा बनाम प्रकाश और अन्य पर दिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया 2020 के फैसले को आधार बनाया। फैसले के मुताबिक एक बालिग अविवाहित बेटी जो शारीरिक या मानसिक असामान्यता या चोट से पीड़ित नहीं है, वह सेक्शन 125 सीआरपीसी के तहत अपने पिता से भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने गुजारा भत्ता की अर्जी खारिज कर दी।
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