उधमपुर। डिजिटल और सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में प्रतिभा को पहचान मिलने के रास्ते पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं। खासकर महिलाओं के लिए सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बनकर उभरा है, जहां वे अपने हुनर को दुनिया के सामने रखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकती हैं। उधमपुर के चरी सयाल की रहने वाली अनामिका शर्मा (25) की कहानी इसी बदलाव की सशक्त तस्वीर पेश करती है, जिन्होंने कला, फैशन और सोशल मीडिया ट्रेंड को जोड़कर महिला सशक्तीकरण की एक नई मिसाल कायम की है।
अनामिका एक चित्र कलाकार हैं, लेकिन उनका कैनवास पारंपरिक नहीं है। वह कागज या दीवारों पर नहीं, बल्कि लोगों द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों (हाथ से पेंटिंग, कढ़ाई) पर चित्र उकेरती हैं। साड़ी, कुर्ता, दुपट्टा और टी-शर्ट-हर कपड़ा उनके लिए एक नया कैनवास होता है। ब्रश और रंगों के जरिए वह साधारण कपड़ों को ऐसी कलाकृतियों में बदल देती हैं, जो चलते-फिरते आर्ट पीस बन जाते हैं। फूलों, लोककला और आधुनिक डिजाइनों से सजे ये कपड़े सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि कला की जीवंत अभिव्यक्ति हैं, जो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे आज अनामिका एक सफल महिला उद्यमी के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। लगभग एक साल पहले शुरु हुआ उनके स्वरोजगार का यह सफर आज साढे 4 लाख तक की सालाना आय तक पहुंच चुका है।
अनामिका का कहना है कि आज के दौर में ''''हैंडमेड'''', ''''सस्टेनेबल फैशन'''' और ''''पर्सनलाइज्ड स्टाइल'''' की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी ट्रेंड को समझते हुए अपने काम को ''''दीपक क्रिएशन्स'''' नाम से इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा करना शुरू किया। उनके बनाए कपड़ों की रील्स और तस्वीरें देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींचने लगीं। रंगों की बारीकी, डिजाइन की मौलिकता और हाथ से बनी कला की खूबसूरती ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।
बीएससी ऑनर तक पढ़ाई करने के बाद यूपीएससी की तैयारी कर रही अनामिका शहीद पीएसआई दीपक शर्मा की बहन हैं। वे कहती हैं कि साल 2024 को उनके भाई पीएसआई दीपक शर्मा, कठुआ में अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो गए थे। इससे उन्हें काफी ज्यादा मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा। इस दौरान उन्होंने चिकित्सीय सलाह पर चित्रकारी करना शुरू किया, जो उनका बचपन का शौक भी था। इसी को उन्होंने बाद में अपना स्वरोजगार का साधन भी बना लिया। चार से पांच अन्य महिलाओं को भी अपने साथ इस काम में जोड़ा है। भविष्य में उनका सपना अपने इस काम को विस्तार देने का है।
दीपिका की कहानी यह साबित करती है कि आधुनिक दौर में कला और उद्यमशीलता के साथ सोशल मीडिया का संगम महिलाओं को नई उड़ान दे सकता है। यह सिर्फ़ एक कलाकार की सफलता नहीं, बल्कि उस बदलती सोच का प्रतीक है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान खुद गढ़ रही हैं।