पुरस्कार हासिल करते बागवान तौकीर अहमद।
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भद्रवाह। भद्रवाह के प्रगतिशील लैवेंडर उद्यमी और ‘भारत के लैवेंडर मैन’ के नाम से विख्यात तौकीर अहमद बागवान को आईसीएआर-अटारी, लुधियाना ने इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) परिसर लुधियाना में आयोजित अटारी के फाउंडेशन डे कार्यक्रम में प्रदान किया गया।
यह पुरस्कार लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने में तौकीर की अग्रणी भूमिका के लिए दिया गया है। इनके प्रयासों से भद्रवाह को आज देशभर में ‘लैवेंडर कैपिटल ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचान मिल रही है। उनके कार्यों ने न केवल क्षेत्र की कृषि तस्वीर बदली है बल्कि भद्रवाह को भारत की सुगंधित फसलों की क्रांति के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया है। तौकीर बागवान को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) डोडा, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्काॅस्ट) जम्मू की ओर से नामांकित किया गया था। इसमें डोडा जिले में लैवेंडर खेती में उनके व्यापक योगदान का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया।
पुरस्कार मुख्य अतिथि डॉ. राजेश्वरी सिंह चंदेल, कुलपति डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (वाईएसपीयूएचएफ) सोलन द्वारा प्रदान किया गया। इस माैके पर डॉ. अमरीश वैद (निदेशक विस्तार स्काॅस्ट जम्मू), डॉ. परविंदर श्योरन (निदेशक, अटारी लुधियाना), डॉ. गुरबचन सिंह (पूर्व अध्यक्ष, एएसआरबी, नई दिल्ली) और डॉ. नचिकेत (निदेशक, सीआईपीएचईटी) सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। तौकीर बागवान भद्रवाह और डोडा जिले के आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लैवेंडर खेती को अपनाने के पीछे प्रेरक शक्ति रहे हैं। किसानों को संगठित करने, जागरूकता कार्यक्रमों और सीएसआईआर-अरोमा मिशन के साथ निकट सहयोग के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि लैवेंडर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों के लिए एक उच्च मूल्य और जलवायु-अनुकूल वैकल्पिक फसल हो सकती है।
डॉ. एएस चाढ़क प्रमुख केवीके डोडा ने तौकीर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि और समर्पण ने जिले में ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ को नई दिशा दी है। वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र पाल ने बताया कि केवीके डोडा ने तौकीर की यात्रा और उपलब्धियों का सूक्ष्म दस्तावेजीकरण कर उन्हें पुरस्कार के लिए नामित किया था।