उधमपुर। लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझ रहे शहर की परेशानी को दूर करने के लिए जल्द ही अमरुत 2.0 परियोजना (अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) पर काम शुरू किया जाएगा। बहुप्रतीक्षित इस परियोजना पर दो साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस परियोजना के पूरा होने से डेढ़ दशक के लिए शहरवासियों को पानी की कमी को लेकर पेश आने वाली परेशानियों से राहत मिल जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य तवी नदी से लिफ्ट किए जाने वाले वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को अपग्रेड करना है। शहरवासी लंबे समय से इस परियोजना का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार, 124.90 करोड़ से स्वीकृत इस परियोजना का कार्य आगामी दो महीने के भीतर प्रारंभ हो जाएगा। इस योजना के तहत दो लाख गैलन क्षमता का नया फिल्ट्रेशन प्लांट, पांच ओवरहेड सर्विस रिजर्वायर (ओएसडी) और दो ग्राउंड रिजर्वायर (जीआरएस) बनाए जाएंगे। इस पूरी परियोजना के पूर्ण होने के बाद उधमपुर में 32 लाख गैलन पानी की अतिरिक्त आपूर्ति क्षमता बढ़ जाएगी।
साल 2020 में शुरू हुई थी कवायद, पांच साल से अटका था प्रस्ताव
उधमपुर नगर के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। पिछले पांच वर्षों से इस परियोजना का प्रस्ताव लंबित था। प्रशासनिक औपचारिकताओं और स्वीकृतियों में देरी के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे शहर में जलापूर्ति की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
दो साल में होगा काम पूरा
विभागीय जानकारी के अनुसार, अमृत 2.0 योजना के तहत उधमपुर में जलापूर्ति नेटवर्क को आधुनिक बनाया जाएगा। फिल्ट्रेशन प्लांट, पाइपलाइन और स्टोरेज रिजर्वायर के निर्माण का कार्य दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पानी की आपूर्ति व्यवस्था अगले 15 वर्षों तक स्थिर और पर्याप्त बनी रहेगी। अमृत 2.0 के तहत लागू की जा रही यह परियोजना न केवल मौजूदा आवश्यकताओं को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य में जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
प्रतिदिन 16 लाख गैलन की कमी से जूझ रहा शहर, अब बढ़ेगी क्षमता
वर्तमान में उधमपुर शहर को करीब 34 लाख गैलन पानी की आपूर्ति की जाती है, जबकि शहर की कुल मांग लगभग 50 लाख गैलन प्रतिदिन की है। यानी हर दिन 16 लाख गैलन पानी की कमी बनी रहती है। जनसंख्या वृद्धि और शहरी विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में यह समस्या और गहरी हो सकती थी। अमृत 2.0 योजना के तहत पानी की स्टोरेज और फिल्ट्रेशन क्षमता में 32 लाख गैलन की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल जलापूर्ति क्षमता 66 लाख गैलन तक पहुंच जाएगी।
फिल्ट्रेशन प्लांट और रिजर्वायरों का विस्तृत खाका
परियोजना के अंतर्गत बनने वाला दो लाख गैलन क्षमता वाला फिल्ट्रेशन प्लांट अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होगा। इसमें स्वचालित नियंत्रण प्रणाली, जल गुणवत्ता मॉनिटरिंग सेंसर और ऊर्जा-सक्षम पंपिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा, पांच ओवरहेड सर्विस रिजर्वायर (ओएसडी) शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थापित किए जाएंगे ताकि पानी का दबाव समान बना रहे और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी निर्बाध आपूर्ति हो सके। दो ग्राउंड रिजर्वायर (जीआरएस) पानी के भंडारण और वितरण के केंद्र के रूप में काम करेंगे। इससे आपातकालीन स्थिति या तकनीकी दिक्कतों के समय भी शहर की आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
शहरवासियों को मिलेगी बड़ी राहत
पानी की कमी से जूझ रहे उधमपुर के नागरिकों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित होगी। गर्मी के मौसम में अक्सर कई वार्डों में नलों से पानी की बूंदें तक नहीं आती थीं। आम दिनों में भी शहर के कई हिस्सों में एक दिन छोड़कर एक दिन सप्लाई की जाती है। इसके अलावा दूषित पानी, लीकेज और कम पानी की सप्लाई मिलने की समस्या से शहरवासी परेशान होते हैं। इससे नागरिकों को निजी टैंकरों या हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। परियोजना पर काम पूरा होने के बाद यह स्थिति बदलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना पूरी होने के बाद बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
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कोट
परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद टेंडरिंग की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया गया है और आगे एक से डेढ़ महीने में जमीनी स्तर पर इसका काम शुरू हो जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में यह कार्य पूरी तरह से पूर्ण हो और किसी भी क्षेत्र में पानी की कमी न रहे।
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संदीप गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग उधमपुर