देश के विभिन्न हिस्सों से आईं बाइकर्स ने शुरू किया जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिलों कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ का दौरा
संवाद न्यूज एजेंसी
भद्रवाह। देश के विभिन्न हिस्सों से आईं 20 महिला बाइकर्स ने जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिलों कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ का सादौरा शुरू किया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश की संप्रभुता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों और आतंकवाद का सामना करते हुए जान गंवाने वाले नागरिकों के परिवारों से मिलना है।
शांति उद्घोष फाउंडेशन से जुड़ी इन महिला राइडर्स ने राइड विद प्राइड 3.0 अभियान के तहत समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चथरगल्ला दर्रे को पार कर भद्रवाह पहुंचीं। इस यात्रा का आयोजन भद्रवाह विकास प्राधिकरण, शांति उद्घोष फाउंडेशन और अमेजिंग भद्रवाह टूरिज्म एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। 18 जुलाई को जम्मू के बलिदान स्तंभ से शुरू हुई यह यात्रा बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निकाली गई है।
भद्रवाह पहुंचने पर लोगों ने पारंपरिक संगीत और लैवेंडर के फूल भेंटकर महिला बाइकर्स का भव्य स्वागत किया। भारी बारिश और कठिन रास्तों की परवाह न करते हुए बाइकर्स भद्रवाह के विभिन्न दूरदराज गांवों भारा, मंथला, धुमांडा और थुब्बा पहुंचीं। वहां उन्होंने 21 बलिदानियों के परिवारों और आतंकवादियों से लोहा लेने वाले पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
प्रीति चौधरी के नेतृत्व में बाइकर्स दल ने अपने दिन की शुरुआत देश के सबसे अलंकृत सैनिकों में शामिल अशोक चक्र, वीर चक्र और सेना पदक से सम्मानित नायब सूबेदार चुन्नी लाल के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर की। बाइकर्स ने उनके पैतृक गांव भारा (खेल्लानी पंचायत) में परिजनों से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) और आम का पौधा भेंट किया। प्रीति चौधरी ने बताया कि वे जम्मू युद्ध स्मारक (बलिदान स्तंभ) से अपनी यात्रा शुरू कर बिलावर, बसोहली, बनी, लोआंग और सरथल होते हुए चौथे दिन भद्रवाह पहुंची हैं।
उत्तराखंड से आईं 43 वर्षीय बाइकर शिल्पी बाजवा ने बताया कि सेना और पुलिस बलों के बलिदान के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन यहां आकर उन्हें बिना हथियार के आतंकवाद का मुकाबला करने वाले आम नागरिकों की वीरता का पता चला। धुमांडा गांव के निवासी चंद्र प्रकाश ने बताया कि 1993 में उनके छोटे भाई ने गांव को आतंकवादियों से बचाते हुए अपनी जान दे दी थी। आज इतने सालों बाद जब इन महिला बाइकर्स ने आकर उनके भाई को श्रद्धांजलि दी तो पूरे परिवार को उनकी शहादत पर गर्व महसूस हुआ।