उधमपुर। जल शक्ति पीएचई कर्मचारी एवं श्रमिक संघ ने जिला अध्यक्ष और जम्मू संभाग के वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता सोमनाथ की अध्यक्षता में अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चालू बजट सत्र के दौरान मांगों को गंभीरता से शामिल करने की मांगी की। प्रदर्शन में रामनगर, माजलता, खून, मानसर, कृमची, जिब थाथी, गढ़ी रहंबल, चिनैनी, कुद और उधमपुर जिले के दूरदराज के इलाकों से कर्मचारी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सोमनाथ ने सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की। उनका आरोप था कि डेलीवेजर्स बजट में सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन उनके प्रति सरासर लापरवाही बरती जा रही है। बजट में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का कोई प्रावधान नहीं है और लंबित वेतन का भी कोई भुगतान नहीं किया गया है।
सोमराज ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, लेकिन सरकार ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। डेलीवेजरों के मुद्दों को समय पर और तत्काल हल किया जाना चाहिए। लगभग 60,000 डेलीवेजरों के मुद्दों की अनदेखी हो रही है जबकि सरकार से समाधान की उम्मीद लगा रखी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अनुरोध करते हुए कहा कि वे समिति की रिपोर्ट को तुरंत लागू करें ताकि श्रमिकों को गुमराह न किया जाए।
क्या हैं मांगें -
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण: सीपी, आईटीआई, भूमि अधिग्रहण मामले के कर्मचारियों को एसआरओ-64 के अनुसार 7 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को बिना किसी देरी के नियमित किया जाना चाहिए और अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक कर्मचारी के सभी लंबित भुगतानों को पूरा किया जाना चाहिए, ताकि वेतन जारी होने पर कर्मचारियों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और अपनी आजीविका चला सकें।
लंबित वेतन का भुगतान:
2014-2020 के दौरान पिछले 65-70 महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। भाजपा और पीडीपी गठबंधन सरकारों में तत्कालीन मंत्रियों की भागीदारी के कारण कर्मचारियों के सभी लंबित वेतन ब्याज सहित जारी किए जाएं। इसके अलावा, विभाग से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का भी बकाया है। छह वर्षों के लंबित वेतन की देनदारी 4.50 करोड़ रुपये है।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम:
श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी सरकारी आदेशानुसार दी जानी चाहिए, जिस तरह लेह केंद्र शासित प्रदेश में श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अनुसार भविष्य में किसी को भी (नियमित और दैनिक वेतनभोगी) काम पर नहीं रखा जा सकता। केंद्र शासित प्रदेश लेह में दैनिक वेतनभोगियों की दर बढ़ा दी है, लेकिन जम्मू के साथ भेदभाव हमेशा चरम पर रहता है क्योंकि यहां दैनिक वेतनभोगियों की दर मात्र 311 रुपये प्रतिदिन है, जो पूरे देश में कहीं भी नहीं है।
सोमनाथ ने सरकार से अपील की कि चालू बजट में दैनिक वेतन भोगियों के लिए नियमितीकरण नीति पर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस बार भी उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन में विजय शर्मा, सूरज प्रकाश, जगदीश, दिनेश केसर, शाम लाल, विनोद कुमार, करण सिंह, मोहन सिंह, परवीन, जावेद, तिलक राज, शंभू नाथ, रतन लाल आदि वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया।