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जनता को बिजली और वाहन फिटनेस के नाम पर किया गया गुमाराह : वर्मा

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उधमपुर। पिछले 70 वर्षों से लोगों को धर्म, जाति और क्षेत्र के नाम पर बांटने की राजनीति कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इससे आज एक मेडिकल काॅलेज को बंद करना पड़ा। अब बिजली, वाहन फिटनेस के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। ये आरोप नेकां के अतिरिक्त प्रवक्ता आकाश वर्मा ने लगाए।
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वर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया जिसमें ट्रांसपोर्टरों को दूसरे जिले में जाकर फिटनेस टेस्ट करवाने के लिए बाध्य किया गया हो। फिटनेस टेस्ट की पूरी प्रक्रिया एक केंद्रीकृत आनलाइन साइट के माध्यम से होती है, जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय नियंत्रित करता है। इसका तकनीकी संचालन नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर द्वारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण प्रक्रिया में देरी हुई लेकिन कुछ ट्रांसपोर्टर्स ने कुछ नेताओं के साथ मिलकर भ्रमित होकर चक्का जाम कर दिया। मामला परिवहन मंत्री सतीश शर्मा तक पहुंचा जिन्होंने इस दावे को खारिज किया और बाद में चक्का जाम का मसला सुलझा लिया गया। उनका यह भी आरोप था कि एक समुदाय द्वारा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का पुतला जलाया गया, जुलूस निकाला गया और बिजली संकट को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों ने हाल ही में श्राइन बोर्ड मेडिकल कालेज विवाद में भी हिंदू-मुस्लिम राजनीति की, जिसके कारण आज वह कालेज बंद हो गया है। यही लोग संघर्ष समिति के नाम से सामने आए और समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि तीन जनवरी 2024 को 850 मेगावाट की रटले हाइड्रो पावर परियोजना एनएचपीसी द्वारा राजस्थान की एक आईटी कंपनी को 40 साल के लिए सौंप दी गई जो बेहद शर्मनाक है। पानी हमारा है लेकिन बिजली बाहर के राज्यों और कंपनियों को दी जा रही है।
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