उधमपुर। सब-जज/स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने साइबर फ्रॉड का शिकार हुए व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया है। साइबर सेल की तरफ से जब्त की गई धोखाधड़ी की राशि को हकदार को सौंपने का निर्देश दिया।
अनूप कुमार पांडे ने उनके पक्ष में राशि जारी करने के लिए आवेदन दायर किया था। आवेदक ने 3 दिसंबर 2025 को साइबर धोखाधड़ी की सूचना दी। इसमें एक अज्ञात व्यक्ति ने उनके खाते से दो ऑनलाइन लेनदेन में अवैध रूप से 25,690 रुपये निकाल लिए। यह शिकायत ऑनलाइन दर्ज की गई। इसके बाद साइबर सेल ने धोखाधड़ी की गई राशि को फ्रीज कर दिया।
साइबर सेल, उधमपुर ने तुरंत फंड जारी करने पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि जांच चल रही है और मामले की अभी भी संबंधित अधिकारियों से पुष्टि की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि इस शुरुआती चरण में राशि जारी नहीं की जानी चाहिए जब तक कि यह निश्चित रूप से स्थापित न हो जाए कि फंड आवेदक का है।
आवेदन, साइबर सेल की रिपोर्ट और आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद कोर्ट ने पाया कि धोखाधड़ी वाले लेनदेन से 25,690/- रुपये विभिन्न इंडियन ओवरसीज बैंक खातों में रोक दिए गए हैं। ऐसा लगता है कि यह आवेदक का है। इंचार्ज, साइबर सेल, उधमपुर को निर्देश दिया गया कि उचित रसीद प्राप्त करने के बाद 25,690 रुपये आवेदक को सुपुर्दनामा (बॉन्ड) पर जारी करें। यदि कोई बेहतर दावेदार सामने आता है और अपना दावा साबित करता है, तो सुपुर्ददार उन्हें मुआवजा देंगे। संबंधित बैंक को भी निर्देश दिया गया कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 30 दिनों के भीतर फंड आवेदक के खाते में ट्रांसफर करें।