उधमपुर। चिनैनी में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय ने सड़क दुर्घटना में जब्त वाहन को चालक के आवेदन पर कुछ खास शर्तों पर छोड़ने का आदेश दिया।
मोहम्मद इमरान ने गाड़ी नंबर (जेके19ए-2933) को छोड़ने के लिए अदालत में अर्जी दी थी। चालक मोहम्मद इमरान ने पुलिस थाना कुद में कस्टडी में रहने के कारण गाड़ी के खराब होने और अपरिवर्तनीय नुकसान की संभावना का हवाला देते हुए उसे छोड़ने का अनुरोध किया था। उसने कार्यवाही के दौरान गाड़ी को न बेचने, न बदलने या किसी और को न देने का वादा किया और एक अंडरटेकिंग या सपुर्दनामा देने की पेशकश की।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक 8 दिसंबर को एक सड़क दुर्घटना के बाद एफआईआर दर्ज की गई। यह दुर्घटना जलेबी मोड़, नेशनल हाईवे के पास जगदीश कुमार द्वारा चलाई जा रही वैन और मोहम्मद इमरान द्वारा चलाई जा रही टाटा मोबाइल के बीच हुई। रिपोर्ट में वैन ड्राइवर को चोटें लगने, दोनों गाड़ियों को नुकसान, घटनास्थल का निरीक्षण, गाड़ियों को जब्त करने और सेक्शन 180 बीएनएसएस के तहत गवाहों के बयान का जिक्र है। सबसे जरूरी बात यह थी कि रिपोर्ट में कहा गया है कि आवेदक की गाड़ी दोषी नहीं है।
अभियोजन पक्ष ने गाड़ी को छोड़ने का विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि यह बीएनएस के सेक्शन 281 और 125(ए) के तहत मामले की महत्वपूर्ण संपत्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इसे छोड़ने से चल रही जांच पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि यह गाड़ी जरूरी सबूत के तौर पर काम का सकती है। यह भी तर्क दिया कि ड्राइवर गाड़ी को छुड़वाने के लिए सक्षम नहीं है और लंबित मैकेनिकल जांच और मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया गया।
कोर्ट ने सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य मामले का हवाला देते हुए, तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि गाड़ी को हिरासत में रखने का कोई मकसद नहीं है। मामले से जुड़े पुलिस स्टेशन कुद के जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे वाहन को आवेदक यानि ड्राइवर को सौंप दें। असली आरसी अपने पास रखें, गाड़ी की सभी तरफ से तस्वीरें लें, एक सुपुर्दनामा लें और एक मैकेनिकल रिपोर्ट जरूरी रखें। आवेदक को भी कुछ शर्तों का पालन करना होगा। आवेदक कार्यवाही के दौरान वाहन को बेच या डिस्पोज नहीं कर सकता, निर्देश मिलने पर आवेदक को वाहन कोर्ट में पेश करना होगा, वाहन का नेचर या आकार नहीं बदल सकता, आवेदक को जांच अधिकारी के सामने सुपुर्दनामा जमा कराना होगा।